शिवपुरी में कुपोषण से बच्ची की हुई मौत।
- फोटो : अमर उजाला
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में मौसम बदलते ही कुपोषण का जिन्न एक बार फिर से बाहर आ गया है। मप्र के शिवपुरी और श्योपुर जिला कुपोषण के कारण बदनाम हैं और एक बार फिर से इस जिले में एक बच्ची की कुपोषण के चलते मौत हो गई है। शिवपुरी जिले के ग्राम खांदी की रहने वाली एक बालिका ने कुपोषण के चलते अस्पताल में दम तोड़ दिया। अब यह मामला गर्मा है। इस क्षेत्र में कुपोषण को लेकर चलाई जा रही मुहिम व योजनाओं पर सवाल उठ रहे हैं। मामला चर्चा में आने के बाद अब जिला प्रशासन का कहना है कि इस मामले में मृतक बालिका के परिवारजनों की लापरवाही है जिसके कारण बच्ची कुपोषण की चपेट में आई। वहीं, दूसरी ओर जिस मासूम बच्ची की मौत को कुपोषण के चलते हुई है, उसकी मां ने ही अपने परिवार वालों पर भी इलाज न कराने के आरोप लगाए हैं।
अब सफाई दे रहे हैं अधिकारी
कुपोषण से बच्ची का मौत का मामला शिवपुरी जिले के ग्राम खांदी में सामने आया है। यहां एक मासूम बच्ची दिव्यांशी पुत्री लाखन धाकड़ उम्र एक साल तीन माह का उसके स्वजनों ने महज इसलिए इलाज नहीं कराया, क्योंकि वह लड़की थी। परिणाम स्वरूप वह बीमार होकर कुपोषण का शिकार हो गई। दिव्यांशी ने बीते शनिवार को जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस पूरे मामले में सीएमएचओ का कहना है कि बच्ची को एक अगस्त को दस्तक अभियान के तहत चिह्नित किया गया।
सीएमएचओ डॉ. संजय ऋषीश्वर का बयान
सीएमएचओ डॉ संजय ऋषीश्वर ने बताया कि स्वजन को इस बात के लिए समझाया गया कि वह बच्ची को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवा दें, लेकिन उसके परिवार वाले उसे अस्पताल में भर्ती करवाने तैयार नहीं हुए। इसके बाद सरपंच से संपर्क कर मोहल्ले, पड़ोस के लोगों की पंचायत बुलवा कर दिव्यांशी के स्वजन को समझाइश दी गई। इसके बाद उसे उपचार के लिए अस्पताल भर्ती करवाया गया, लेकिन इसके बावजूद उसके परिवार वाले उसे अस्पताल से लेकर घर भाग गए। शनिवार को बच्ची को जिला अस्पताल लेकर आए, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
हर साल यहां पर 2000 से ज्यादा बच्चे कुपोषित चिन्हित
मध्य प्रदेश का शिवपुरी और श्योपुर जिला कुपोषण को लेकर बदनाम है। पूर्व में यहां पर कुपोषण के चलते कई बच्चों की मौत हो चुकी है। शिवपुरी जिले की बात करें तो हर साल यहां पर 2000 से ज्यादा बच्चे कुपोषित चिन्हित किए जा रहे हैं। इनके इलाज के लिए विभिन्न सरकारी योजनाएं चल रही हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कुपोषण को दूर करने के लिए शिवपुरी जिले में जिला मुख्यालय के अलावा सभी विकासखंड मुख्यालय पर एनआरसी संचालित की जा रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयासों से इन एनआरसी में कुपोषित बच्चों का इलाज किया जाता है। इसके अलावा ग्राम व आंगनबाड़ी केंद्र पर जहां भी कुपोषित बच्चे मिलते हैं वहां पर उन्हें आंगनबाड़ी केंद्र के माध्यम से इन एनआरसी में भर्ती किया जाता है और निगरानी की जाती है।
ये भी पढ़ें- Damoh News: पिता की हत्या मामले में गवाही के पहले बेटा लापता, पेड़ से लटका मिला शव, परिजनों ने किया प्रदर्शन
एक हजार वाली पोषण आहार योजना के बाद भी नहीं सुधरी हालत
शिवपुरी के अलावा श्योपुर जिले में ही पूर्व में कई बच्चों की मौत कुपोषण के चलते हो चुकी है। खासकर सहरिया आदिवासी बेल्ट में कई बच्चे कुपोषण के कारण मर चुके हैं। वर्ष 2018 में मप्र की शिवराज सरकार ने सहरिया आदिवासियों में कुपोषण को कम करने के लिए उन्हें हर महीने 1000 रुपए की सहायता राशि पोषण आहार के रूप में देने की शुरूआत की थी। इस योजना के पीछे मंशा थी कि सहरिया आदिवासी परिवार जिन्हें खाने की कमी रहती है उन्हें उचित आहार मिल सके। यह योजना अभी भी संचालित की जा रही है। इस योजना के संचालन के बाद भी सहरिया आदिवासियों में कुपोषण कम नहीं हो रहा है।
ये भी पढ़ें- Bhopal: ड्रग्स उद्योग के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन, दूसरे राज्यों के पुलिस की कार्रवाई पर भोपाल पुलिस से सवाल