बैलगाड़ी पर रखते हुए नौ हजार पेज की जानकारी
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संघर्ष के बाद मिली जानकारी तो बैलगाड़ी लेकर पहुंचे कार्यालय...
आवेदक माखन धाकड़ को इतने संघर्ष के बाद खाली जेब होने का दर्द तो था, लेकिन जानकारी मिलने की खुशी भी थी। इस खुशी को अनोखे अंदाज से मनाने के लिए उन्होंने अपने एक परिचित की बैलगाड़ी मांगी और 500 रुपये में दो ढोल नगाड़े वालों के साथ नगर परिषद कार्यालय जा पहुंचे। माखन धाकड़ नगर परिषद बैराड़ कार्यालय बैलगाड़ी से पहुंचे आरटीआई से मिली जानकारी के दस्तावेजों को गिनने के लिए चार लोगों को साथ ले गए, जिन्हें गिनने में दो घण्टे लग गए। फिर सिर पर कागज लेकर माखन ने स्वयं बैलगाड़ी में रखे और ढोल नगाड़ों के साथ वो अपने घर के लिए रवाना हुए।
बैंड-बाजा और बैलगाड़ी ले आए
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न्यायपालिका तक का लेंगे सहारा...
एक्टिविस्ट माखन धाकड़ ने बताया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उन्होंने यह आवाज दो महीने पहले उठाई थी। नगर परिषद बैराड़ के कर्मचारी ने जानकारी देने से मना कर रहे थे, जिसके बाद उन्होंने भोपाल तक का सहारा लिया। अंत में उन्हें जीत हासिल हुई। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की कुछ शासकीय योजनाए हैं, जो धरातल पर बिल्कुल नहीं हैं। कागजों में ही उनका समापन किया जाता है, जिसके चलते उन्होंने यह जंग लड़ी है। अंत तक वह यह जंग लड़ेंगे। इसमें न्यायपालिका तक का सहारा लेकर सभी को न्याय दिलाएंगे।