एनएच-46 पर मंगलवार को कुछ ही दूरी पर हुए दो हादसों में सात गायें ट्रकों की चपेट में आ गईं। पांच की मौत और दो गंभीर घायल हुईं। इस सीजन में 50 से अधिक गौवंश की मौत हो चुकी है।
एनएच-46 पर तेज रफ्तार वाहनों के बीच सड़क पर बैठे गौवंश की सुरक्षा एक बार फिर बड़ा सवाल बन गई है। मंगलवार को हाईवे पर कुछ ही दूरी के अंतराल में हुए दो सड़क हादसों में सात गायें ट्रकों की चपेट में आ गईं। इनमें पांच की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो गंभीर रूप से घायल हैं।
पहली घटना लुकवासा चौकी क्षेत्र में देहरदा ओवरब्रिज के पास हुई। बताया गया कि शिवपुरी की ओर से गुना जा रहे ट्रक के सामने अचानक सड़क पर बैठी गायें आ गईं। चालक ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन ट्रक की चपेट में आने से चार गायों की मौके पर ही मौत हो गई। एक अन्य गाय गंभीर रूप से घायल हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि ट्रक की चपेट में आए मवेशी सड़क पर काफी दूर तक घिसटते चले गए। दूसरी घटना बदरवास थाना क्षेत्र में सुमेला गांव के पास हुई। यहां भी हाईवे पर मौजूद दो गायें तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आ गईं। इनमें एक गाय ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि दूसरी गंभीर रूप से घायल हो गई।
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने हाईवे पर आवारा और बेसहारा गौवंश की मौजूदगी को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सुमेला के पास गौशाला होने के बावजूद हाईवे पर गौवंश के बैठे रहने की स्थिति बनी हुई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, सड़क किनारे पर्याप्त निगरानी और प्रभावी व्यवस्था नहीं होने के कारण मवेशी वाहनों के बीच पहुंच जाते हैं। दिन में वाहन चालक मवेशियों को देखकर गति नियंत्रित कर लेते हैं, लेकिन रात के समय तेज रफ्तार वाहनों के सामने अचानक गौवंश के आने से हादसे का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, इस सीजन में एनएच-46 पर सड़क हादसों में अब तक 50 से ज्यादा गौवंश की जान जा चुकी है। बार-बार हो रही मौतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाना चिंता का विषय है। एक ओर हाईवे पर भारी वाहनों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर सड़क पर मवेशियों का जमावड़ा हादसों को न्योता दे रहा है।
गौवंश को सड़कों पर बैठने से रोकने के लिए प्रशासन की ओर से संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए जा चुके हैं। कलेक्टर अर्पित वर्मा ने भी इस संबंध में व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद एनएच-46 पर मवेशियों की मौजूदगी बनी हुई है। मंगलवार को हुए हादसों ने सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर प्रशासनिक आदेशों को जमीनी स्तर पर प्रभावी तरीके से लागू क्यों नहीं किया जा पा रहा है।
गौवंश की सुरक्षा के लिए केवल हादसे के बाद कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। हाईवे के संवेदनशील हिस्सों की पहचान, नियमित निगरानी, गौशालाओं के बेहतर प्रबंधन और सड़क पर मवेशियों को आने से रोकने की ठोस व्यवस्था जरूरी है। वरना तेज रफ्तार वाहनों और सड़क पर बैठे गौवंश के बीच टकराव का यह सिलसिला आगे भी जारी रहने का खतरा बना रहेगा।