मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने इस बार शिवपुरी जिले की पांच विधानसभा सीटों पर अपने पुराने चेहरों पर दोबारा से भरोसा जताया है। हालांकि दूसरी ओर कांग्रेस ने इस बार कुछ नए चेहरों को मैदान में उतारा है।
1- शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र
2- पोहरी विधानसभा क्षेत्र
पोहरी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा ने इस बार अपने पूर्व विधायक और वर्तमान में पीडब्ल्यूडी राज्य मंत्री सुरेश राठखेड़ा को टिकट दिया है। धाकड़ बहुल इस विधानसभा सीट पर सुरेश रथ खेड़ा इसी जाति से आते हैं और उन्हें इसका फायदा मिलने की उम्मीद है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने बसपा छोड़कर आए कैलाश कुशवाह को टिकट दिया है। कैलाश कुशवाह पूर्व में यहां पर दो बार बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। यहां पर भाजपा प्रत्याशी खिलाफ एंटी इनकंबेंसी का माहौल है, जिसका फायदा कांग्रेस प्रत्याशी को मिल सकता है
3- करैरा विधानसभा क्षेत्र
करैरा में भाजपा ने यहां पर ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर आए पूर्व विधायक जसवंत जाटव को टिकट नहीं दिया है। वर्ष 2020 में हुए दलबदल के बाद जब यहां पर उपचुनाव हुए तो यहां पर जसवंत जाटव को 30 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा। इसलिए भाजपा ने यहां पर इस बार रमेश खटीक को टिकट दिया है। रमेश खटीक यहां पर पूर्व में विधायक रह चुके हैं। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने अपने सीटिंग एमएलए प्रागीलाल जाटव को दोबारा मौका दिया है। इस विधानसभा सीट पर जाटव वोटर बड़ी संख्या में हैं, इसका फायदा यहां पर कांग्रेस प्रत्याशी को हो सकता है। इसके लिए अलावा करैरा भाजपा में आपसी गुटबाजी सबसे बड़ी समस्या है।
4- पिछोर विधानसभा क्षेत्र
पिछोर में इस बार सबसे बड़ा फेरबदल देखना को मिला है। यहां पर कांग्रेस के नेता केपी सिंह जो यहां 30 साल से लगातार विधायक निर्वाचित होते हुए आ रहे हैं, उन्होंने अपनी सीट बदल ली है। केपी सिंह को कांग्रेस ने शिवपुरी से अपना प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस ने पहले यहां पर शैलेंद्र सिंह को अपना प्रत्याशी बनाने की घोषणा की थी, लेकिन तीन दिन में ही प्रत्याशी बदलकर अरविंद लोधी को कांग्रेस ने टिकट दे दिया। भाजपा ने यहां से प्रीतम लोधी को टिकट दिया है। दो बार से वह कांग्रेस के केपी सिंह से नजदीकी मुकाबले में हारते हुए आ रहे थे, लेकिन इस बार यह यहां पर मजबूत दावेदार हैं।
5- कोलारस विधानसभा क्षेत्र
कोलारस विधानसभा में इस बार यादव वर्सेस यादव मुकाबला रहेगा। कांग्रेस ने यहां पर बैजनाथ यादव को टिकट दिया है। जबकि भाजपा ने पूर्व विधायक और ज्योतिरादित्य के साथ कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए महेंद्र यादव को मौका दिया है। महेंद्र यादव के पिता राम सिंह यादव भी इस सीट से विधायक रह चुके हैं। इनका निधन के बाद उपचुनाव में महेंद्र यादव कांग्रेस से विधायक निर्वाचत हुए थे, लेकिन बाद में वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में इन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस बार महेंद्र यादव को ज्योतिरादित्य की सिफारिश पर टिकट मिला है। इस सीट पर यादव वोटरों की अच्छी खासी संख्या है। इस कारण से यहां पर दो यादवों के बीच मुकाबला है।