मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव की अब उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। जिन सीटों पर पार्टियों ने उम्मीदवार घोषित कर दिए है, वहां प्रत्याशी चुनावी रण में उतर चुके हैं। लेकिन जहां पर अभी उम्मीदवारों की घोषणा होना बाकी है, वहां दावेदारों की निगाहें आने वाली सूची पर अटकी हैं। अगर शहडोल जिले की बात करें तो यहां पर तीन विधानसभा क्षेत्र हैं। जिनमें से दोनों मुख्य पार्टियों में से कांग्रेस ने जहां केवल जैतपुर विधानसभा में प्रत्याशी की घोषणा की है। वहीं, भाजपा ने जैतपुर व जयसिंहनगर दोनों ही विधानसभा क्षेत्र में अपने प्रत्याशी मैदान में उतार दिए हैं। इस लिहाज से जैतपुर विधानसभा की तस्वीर साफ हो गई है। कांग्रेस ने जैतपुर से बुढ़ार जनपद की अध्यक्ष उमा धुर्वे को एक बार फिर से मैदान में उतारा है तो भाजपा ने जयसिंहनगर के वर्तमान विधायक जय सिंह मरावी की सीट बदलकर उन्हें इस बार जैतपुर से टिकट दी है। मरावी पूर्व में दो बार यहां से विधायक रह चुके हैं। 2018 में उनकी सीट बदलकर उन्हें यहां से जयसिंहनगर विधानसभा भेज दिया गया था। अभी जयसिंहनगर और ब्यौहारी में कांग्रेस के उम्मीदवार घोषित होना बाकी है। भाजपा और कांग्रेस की जैतपुर में इस बार कांटे की टक्कर नजर आ रही है।
जैतपुर में कम होता जीत जा अंतर
इस बार के चुनाव में जैतपुर सीट का मुकाबला दिलचस्प नजर आ रहा है। भाजपा ने उम्मीदवार बदलते हुए इसी सीट से 2 बार विधायक रह चुके जयसिंह मरावी को फिर से मैदान में उतारा था, जिसके जवाब में कांग्रेस ने उमा धुर्वे को 2018 के बाद फिर से मौका दिया है। पिछले चुनाव में उमा धुर्वे ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी थी और पिछली बार जीत का अंतर महज 4 हजार तक रह गया था। जबकि इसके पूर्व यहां 15 एवं 11 हजार मतों से भाजपा ने जीत का परचम लहराया था। लेकिन पिछले तीन विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत का अंतर धीरे धीरे कम होता गया। सबसे ख़ास बात तो यह है कि जैतपुर में जितने अंतर से भाजपा ने 2018 में जीत दर्ज कि थीं, उसके मुकाबले यहां से गोंगपा को 11 हजार व बसपा को छह हजार से अधिक मत मिले थे। यदि यह वोट साधने में कांग्रेस सफल रही तो वह यह सीट भाजपा से बड़ी ही आसानी से जीत सकती है। इसके लिए बस इतना जरूरी है कि अपना पिछले वोट कांगेस को साधकर रखने होंगे। वहीं, इस बार यहां 16 हजार नए मतदाता जुड़े हैं, जो कि किसी भी प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
ब्यौहारी में दोनों पार्टियों का चिंतन जारी
ब्यौहारी विधानसभा सीट में वर्तमान भाजपा विधायक शरद कोल मुख्य एवं प्रबल दावेदार हैं, लेकिन उनकी पिछली पृष्ठ भूमि व कांग्रेस से नजदीकी को लेकर भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व पशोपेश में है। वहीं, कांग्रेस से पूर्व प्रत्याशी रहे रामपाल सिंह ने अपनी दावेदारी की ताल ठोक रखी है। लेकिन दोनों ही पार्टियां अपना उम्मीदवार तय नहीं कर पा रही हैं। प्रदेश में इस बार भाजपा और कांग्रेस में कड़ा मुकाबला है। 2018 में जब कमलनाथ की सरकार आई थी तब शरद ने अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस सरकार का समर्थन कर दिया था। इससे भाजपा बैकफुट में आ गई थी। इसलिए भी यहां पर दोनों पार्टियों का विचार विमर्श जारी है।
भाजपा ने यहां बदला है चेहरा
जयसिंहनगर में भाजपा ने इस बार चेहरा बदल दिया है। जैतपुर की वर्तमान विधायक मनीषा सिंह को यहां से चुनावी मैदान में उतार दिया है। हालांकि जैतपुर से विधायक रही मनीषा सिंह का जैतपुर क्षेत्र में विरोध के चलते जयसिंहनगर में मौका दिया है और डैमेज कंट्रोल के लिए जयसिंहनगर के विधायक जयसिंह मरावी को जैतपुर से मौका दे दिया। वहीं, जयसिंहनगर में कांग्रेस पुराने और नए चेहरे को लेकर पशोपेश में हैं। वहीं कांग्रेस से यहां पर मुख्य दावेदारों में जिला पंचायत अध्यक्ष नरेन्द्र मरावी के साथ-साथ जनपद सदस्य जय करण सिंह भी टिकट की दौड़ में शामिल हैं। वहीं लगातार दो बार से चुनाव हार रहे ध्यान सिंह भी अपनी दावेदारी जता रहे हैं। बहरहाल यहां से कांग्रेस की ओर से जिला पंचायत अध्यक्ष नरेंद्र मरावी अभी टिकट की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं। कांग्रेस की दूसरी सूची का अब सभी को इंतजार हैं। जिसमें शहडोल जिले की जयसिंहनगर व ब्यौहारी से उम्मीदवार के नाम घोषित हो सकते हैं।