फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shahdol News: हाथियों के आतंक के बीच ‘गज रक्षक ऐप’ बना ग्रामीणों का रियल हीरो, समय रहते बचीं कई जानें

Sat, 16 May 2026 12:13 PM IST
शहडोल ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शहडोल

सार

शहडोल जिले में लगातार बढ़ रहे हाथियों के आतंक के बीच वन विभाग का “गज रक्षक ऐप” ग्रामीणों के लिए सुरक्षा कवच बनकर उभरा है। हाल ही में गिरवा गांव में एक किसान की हाथी के हमले में मौत के बाद जब हाथी अतरिया गांव की ओर बढ़ा, तब ऐप के जरिए जारी अलर्ट से ग्रामीण पहले ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंच गए।
विज्ञापन
(प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में पिछले कुछ वर्षों से जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। हाथियों के हमलों में कई लोगों की जान जा चुकी है और ग्रामीण इलाकों में दहशत का माहौल बना रहता है। हाल ही में केशवाही वन परिक्षेत्र के गिरवा गांव में खेत पर बने मकान में सो रहे एक किसान को हाथी ने कुचलकर मार डाला था। अब वन विभाग का “गज रक्षक ऐप” ग्रामीणों के लिए सुरक्षा कवच बनकर सामने आ रहा है। यह ऐप हाथियों की लोकेशन और मूवमेंट की जानकारी समय रहते लोगों तक पहुंचाकर जनहानि रोकने में मदद कर रहा है।
विज्ञापन


गिरवा से अतरिया पहुंचा हाथी, पहले ही खाली हो गया गांव

जानकारी के अनुसार हाल ही में एक हाथी अनूपपुर सीमा से शहडोल जिले के केशवाही वन परिक्षेत्र में पहुंच गया था। हाथी ने गिरवा गांव में खेत पर बने घर में सो रहे किसान पर हमला कर उसकी जान ले ली थी। घटना के बाद हाथी अतरिया गांव की ओर बढ़ा, लेकिन इस बार बड़ा हादसा होने से पहले ही ग्रामीण सतर्क हो गए। गांव के लोगों ने समय रहते पूरी बस्ती खाली कर सुरक्षित स्थानों पर शरण ले ली।

ऐप में अलर्ट डालते ही मोबाइल पर पहुंची चेतावनी

केशवाही रेंज अधिकारी अंकुर तिवारी ने बताया कि वन विभाग की टीम लगातार हाथी की निगरानी कर रही थी। जैसे ही हाथी गिरवा गांव में दिखाई दिया, उसकी जानकारी तुरंत “गज रक्षक ऐप” में अपडेट की गई। ऐप में अलर्ट जारी होते ही करीब 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों के मोबाइल पर चेतावनी संदेश और अलर्ट टोन पहुंच गई। इसी वजह से अतरिया गांव के लोगों को पहले ही जानकारी मिल गई और वे सुरक्षित स्थानों पर चले गए।
विज्ञापन


दो स्तर पर काम करता है ‘गज रक्षक ऐप’

रेंजर अंकुर तिवारी के मुताबिक मध्यप्रदेश शासन ने पिछले वर्ष इस ऐप को लॉन्च किया था। इसका मुख्य उद्देश्य हाथियों की गतिविधियों की सही जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाना है, ताकि समय रहते लोग सतर्क हो सकें। पहला अलर्ट तब जारी होता है, जब हाथी किसी गांव से करीब 20 किलोमीटर के दायरे में होता है। इस स्थिति में मोबाइल पर मैसेज और अलर्ट टोन के जरिए सूचना दी जाती है। वहीं दूसरा अलर्ट तब सक्रिय होता है, जब हाथी गांव से पांच किलोमीटर के करीब पहुंच जाता है। उस समय ऐप से सीधे फोन कॉल के जरिए लोगों को चेतावनी दी जाती है।

वन विभाग की टीम करती है लाइव अपडेट

वन विभाग की टीम लगातार हाथियों की निगरानी करती है और उसी आधार पर ऐप में जानकारी अपडेट की जाती है। हाथी की लोकेशन बदलते ही अलर्ट भी अपडेट हो जाता है। यही वजह है कि ग्रामीणों को सही और भरोसेमंद जानकारी समय पर मिल पाती है।

500 से ज्यादा ग्रामीणों ने डाउनलोड किया ऐप

रेंजर अंकुर तिवारी ने बताया कि केशवाही वन परिक्षेत्र में अब तक 500 से ज्यादा ग्रामीणों के मोबाइल में “गज रक्षक ऐप” डाउनलोड कराया जा चुका है। ब्यौहारी और केशवाही क्षेत्र में हाथियों की गतिविधियां ज्यादा होने के कारण वहां विशेष अभियान चलाकर लोगों को यह ऐप डाउनलोड कराया जा रहा है। जिले में अब तक करीब दो हजार लोगों के मोबाइल में यह ऐप मौजूद है।

ये भी पढ़ें- Bhojshala Case Live: हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार; मुस्लिम पक्ष जा सकता है सुप्रीम कोर्ट; धार में जश्न
विज्ञापन


अफवाहों से बचने की अपील

वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि ज्यादा से ज्यादा ग्रामीण “गज रक्षक ऐप” डाउनलोड करें और हाथियों से जुड़ी अफवाहों पर ध्यान न दें। विभाग का कहना है कि ऐप में दी गई जानकारी ही सही और प्रमाणिक होती है। फिलहाल गिरवा गांव की घटना के बाद हाथी वापस अनूपपुर सीमा की ओर लौट गया है और बीटीआर तथा केशवाही रेंज की टीमें लगातार उसकी निगरानी कर रही हैं।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें