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कबाड़ से 'चमत्कार': सिवनी के मठ मंदिर में विराजे स्क्रैप वाले भोलेनाथ, जानिए कैसे तैयार हुई यह अनोखी प्रतिमा

Mon, 24 Aug 2026 11:56 AM IST
सिवनी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिवनी

सार

सिवनी के कलाकार विक्की कश्यप और उनकी टीम ने स्क्रैप व वेस्ट मटेरियल से भगवान शिव की भव्य प्रतिमा तैयार की है। तीन महीने की मेहनत से बनी इस कलाकृति को देखने के लिए श्रद्धालुओं और कला प्रेमियों की भीड़ उमड़ रही है। विक्की पिछले पांच साल से सावन में वेस्ट मटेरियल से शिव के अलग-अलग स्वरूप बना रहे हैं।
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सिवनी में स्क्रैप व वेस्ट मटेरियल से भगवान शिव की भव्य प्रतिमा तैयार की गई - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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अमूमन कलाकार कैनवास पर रंग बिखेरते हैं या संगमरमर को तराशते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के कलाकार विक्की कश्यप कचरे और स्क्रैप से कलाकृतियां बनाकर देश-दुनिया में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। विक्की ने अपनी जादुई कला के दम पर न केवल सिवनी जैसे छोटे शहर का नाम रोशन किया है, बल्कि इको-फ्रेंडली आर्ट (Eco-Friendly Art) की एक नई मिसाल पेश की है। पेंच नेशनल पार्क में एशिया की सबसे बड़ी स्क्रैप टाइगर मूर्ति बनाने का रिकॉर्ड दर्ज कराने के बाद अब उन्होंने सावन माह में आस्था का एक ऐसा ही केंद्र खड़ा कर दिया है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आ रहे हैं।
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सिवनी के ऐतिहासिक मठ मंदिर प्रांगण में इन दिनों श्रद्धालुओं और कला प्रेमियों का तांता लगा हुआ है। वजह है विक्की कश्यप और उनकी 8 से 10 लोगों की टीम द्वारा तीन महीने की कड़ी मेहनत से तैयार की गई भगवान शिव की भव्य प्रतिमा।
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स्क्रैप और वेस्टेज से तैयार की भगवान शिव की प्रतिमा
इस अनोखी कलाकृति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे पूरी तरह से अष्टधातु (लोहा, तांबा, पीतल, स्टील, चांदी, सोना और एल्युमिनियम) के स्क्रैप और वेस्टेज का उपयोग करके बनाया गया है। कला और तकनीक के इस अनूठे मिश्रण को देखने के लिए केवल सिवनी ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों से भी भारी भीड़ उमड़ रही है।सविक्की कश्यप का यह हुनर नया नहीं है, बल्कि वे पिछले पांच साल से हर सावन में भगवान शंकर के अलग-अलग रूपों को अनोखे वेस्ट मटेरियल से ढालते आ रहे हैं। इससे पहले वे कभी जूट की रस्सी, तो कभी नारियल के खाली खोखों जैसी बेकार समझी जाने वाली वस्तुओं से दिव्य प्रतिमाएं बना चुके हैं। कबाड़ को कलाकृति में बदलने का उनका यह विजन 'वेस्ट टू वेल्थ' और पर्यावरण संरक्षण का बड़ा संदेश देता है। पूरे जिले में विक्की और उनकी टीम के इस अद्भुत रचनात्मक प्रयास की जमकर सराहना हो रही है।
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टीमवर्क से तैयार होती है अनोखी कलाकृति
इस पूरी कलाकृति को तैयार करने में 10 से 15 लोगों की टीम लगातार काम करती है। टीम के सदस्यों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी जाती हैं। कोई स्क्रैप इकट्ठा करता है, तो कोई उसे बिल्डिंग और मूर्ति को आकार देने में मदद करता है। वहीं, कुछ सदस्य पूरी प्रक्रिया की वीडियो शूटिंग और अन्य काम संभालते हैं। इस तरह टीमवर्क के जरिए पूरी कलाकृति को आकार दिया जाता है। विक्की कश्यप की यह पहल न केवल कला और आस्था का अनूठा संगम है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि बेकार समझी जाने वाली वस्तुओं का रचनात्मक उपयोग कर उन्हें आकर्षक और उपयोगी कलाकृति में बदला जा सकता है।
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