केवलारी थाना प्रभारी शिवशंकर रामटेके को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई थाना में पदस्थ प्रधान आरक्षक मनीष पटवा के रिश्वतखोरी प्रकरण में उनके संदिग्ध आचरण को देखते हुए की गई है। 16 अक्टूबर को जबलपुर लोकायुक्त टीम ने केवलारी थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक मनीष पटवा को 75 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। मामला नगर परिषद केवलारी में सीसी रोड और नाली निर्माण कार्य के ठेके से जुड़ा हुआ है।
जानकारी के अनुसार ठेकेदार नितिन पाटकर ने काम पेटी ठेकेदार राहुल राय को दिया था। घटिया काम और धोखाधड़ी के आरोपों के बाद पाटकर ने राहुल राय के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने आवेदन दिया था।
मांगे थे पांच लाख रुपये
एफआईआर दर्ज करने के एवज में प्रधान आरक्षक मनीष पटवा ने ठेकेदार से पांच लाख रुपये की मांग की थी। ठेकेदार द्वारा इतनी राशि देने में असमर्थता जताने पर एक लाख रुपये पर सहमति बनी थी। इसी लेनदेन के दौरान लोकायुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए पटवा को रिश्वत की राशि 75 हजार रुपये लेते हुए दबोच लिया।
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भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज
लोकायुक्त ने मनीष पटवा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) की धारा 7, 13(1)(डी) और 13(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया है।
टीआई पर भी गिरी गाज
इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए जबलपुर जोन के आईजी प्रमोद वर्मा ने केवलारी थाना प्रभारी शिवशंकर रामटेके को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। आदेश में उल्लेख है कि निरीक्षक रामटेके को संदिग्ध आचरण के चलते निलंबित किया गया है। उन्हें पुलिस लाइन सिवनी में पदस्थ किया गया है और निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। साथ ही उन्हें इस अवधि में तीनों गणनाओं में पुलिस लाइन सिवनी में उपस्थिति अनिवार्य रहेगी।