अब चालान पीओएस यानी प्वाइंट ऑफ सेल मशीन से बनाया जाएगा।
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सीहोर में अब यातायात नियम को तोड़ने वाले वाहन का चालान पीओएस यानी प्वाइंट ऑफ सेल मशीन से बनाया जाएगा। इसके लिए मध्य प्रदेश पुलिस ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से अनुबंध किया है। नियमों तोड़ने वाले वाहनों का चालान बनाने के लिए पुलिस कागज की रसीद काटती है, जिसकी एक कार्बन कॉपी अपने पास रखती है। यही कार्बन कॉपी पूरी चालानी कार्रवाई का ब्योरा होती है जिसमें कई बार भूल-चूक की संभावना भी बनी रहती है। साथ चालान जमा करने वाले वाहनों का ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं रहता जिससे कभी जरूरत पड़ने पर तत्काल उसकी जानकारी मिल सके।
इन्हीं विसंगतियों को दूर करने और पूरी कार्रवाई को पारदर्शी बनाने के लिए पुलिस ने चालानी कार्रवाई में तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया है। जो अब महानगरों से छोटे नगरों और कस्बों तक पहुंच रही है।
बैंक के अधिकारी तथा तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा एनआईसी के साथ मिलकर जिला मुख्यालयों पर पीओएस मशीन संचालन संबंधी प्रशिक्षण दिए जाएंगे। चालान काटने की इस नई तकनीक से पुलिस को कई फायदे होंगे। सबसे पहला तो काम की गति तेज होगी। चालानी कार्रवाई में पूरी तरह से पारदर्शिता रहेगी। जिस वाहन का एक बार चालान बन जाएगा, दूसरी बार यदि वह वाहन नियम का उल्लंघन करते पकड़ा जाता है तो नंबर डालते ही उसका पुराना रिकॉर्ड निकल आएगा। ऐसे में नियमानुसार दूसरी बार नियम तोड़ने पर चालान की डबल राशि वसूल होगी। इस तरह पुलिस के पास वाहनो का एक डाटाबेस तैयार होगा, जो अन्य जांच पड़ताल में भी उपयोगी साबित होगा। चोरी के वाहन आसानी से पकड़ने में सफलता मिल सकेगी।
जानकारों ने बताया कि पीओएस मशीनों में जो सॉफ्टवेयर है, उसे एनआईसी ने बनाया है। इसमें मोटर व्हीकल एक्ट की धाराओं और जुर्माने की राशि फीड की गई है। डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड से भुगतान किया जा सकेगा। ई चालान पीओएस मशीन में यातायात नियम तोड़ने वाले द्वारा क्रेडिट कार्ड से भुगतान करने पर आरबीआई की गाइडलाइन के मुताबिक कुल शमन का 2.10 प्रतिशत + जीएसटी अतिरिक्त सुविधा शुल्क के रूप में भुगतान करना होगा यह नियम केवल क्रेडिट कार्ड के उपयोग करने पर भी लागू होगा। अगर कोई नकद भुगतान करना चाहता है तो इस पर गाड़ी का नंबर और नियम के उल्लंघन की जानकारी फीड करते ही पर्ची निकल जाएगी। इसके बाद नकद भुगतान लिया जा सकेगा। वहीं अगर किसी के पास पैसे नहीं हैं तो वाहन चालक से वह नंबर मांगा जाएगा, जो बैंक खाते से लिंक है। इस नंबर पर पीओएस के जरिये लिंक भेजी जाएगी, जिस पर सात दिन के अंदर भुगतान करना होगा। यदि उल्लंघन करता सात दिवस के भीतर चालान जमा नहीं करता है तो वह स्वत: ही वर्चुअल कोर्ट में स्थानांतरित हो जाएगा।