सीहोर जिले में एक बार फिर धर्मांतरण का मामला सामने आया है। जिला मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर बसे ग्राम बरखेड़ी में इलाज और मुफ्त दवाइयों के बहाने ईसाई धर्म अपनाने का दबाव बनाए जाने की घटना ने लोगों को झकझोर दिया है। इससे पहले भी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में धर्मांतरण के आरोपों को लेकर हंगामा हुआ था, और अब दो महीने के भीतर एक नया मामला सामने आने से इलाके में फिर से सनसनी है।
इलाज और मुफ्त दवाइयों का दिया जा रहा था लालच
कोतवाली पुलिस में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, शिकायतकर्ता सुरेश बारेला और वनेसिंह विश्वकर्मा ने बताया कि आरोपी महेश अपने दो साथियों गोपाल वारेला और प्यार सिंह बारेला के साथ पिछले पंद्रह दिनों से उनसे लगातार संपर्क कर रहा था। आरोपियों ने कहा कि प्रार्थना सभा में आने से शरीर की बीमारियां ठीक हो जाएंगी, और दवाइयां भी मुफ्त दी जाएंगी। इतना ही नहीं, आर्थिक मदद का भी भरोसा देकर उन्हें प्रार्थना सभा में बुलाया गया।
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बुधवार रात हुई सभा में दबाव बनाकर धर्म अपनाने की कोशिश
शिकायत के अनुसार, बुधवार की रात करीब 8 बजे वनेसिंह विश्वकर्मा के घर पर एक सभा रखी गई। इस सभा में आरोपी महेश और उसके साथी आए और उन्होंने धर्म परिवर्तन का दबाव बनाना शुरू किया। जब वनेसिंह और सुरेश ने इस पर आपत्ति जताई, तो आरोपियों ने कहा कि ईसाई धर्म अपनाओ, तभी तुम्हारी तकलीफें दूर होंगी, वरना ईश्वर तुम्हें दंड देगा। ग्रामीणों ने बताया कि यह दबाव लगातार बढ़ता जा रहा था।
विरोध पर गालियां और धमकियां दीं
धर्मांतरण का विरोध करने पर मामला बिगड़ गया। सुरेश और वनेसिंह के अनुसार, जब उन्होंने आरोपियों के झांसे में आने से मना किया, तो तीनों आरोपियों ने न केवल उन्हें अपशब्द कहे बल्कि जान से मारने की धमकी भी दी। इस दौरान गांव के कुछ अन्य लोग भी मौके पर पहुंचे, जिन्होंने यह सब देखा। इसके बाद दोनों पीड़ितों ने हिम्मत दिखाते हुए कोतवाली थाने पहुंचकर पूरी घटना की जानकारी पुलिस को दी।
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पुलिस ने दर्ज की एफआईआर, जांच उपनिरीक्षक को सौंपी
कोतवाली पुलिस ने पीड़ितों की शिकायत पर आरोपियों महेश, गोपाल वारेला और प्यार सिंह बारेला के खिलाफ वीएनएस सहित मध्यप्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम के मामला तहत दर्ज किया है। इस मामले की जांच उपनिरीक्षक श्याम कुमार अहिरवार को सौंपी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए गए तो आगे कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
समाज में फैली चिंता, लोग बोले-धर्म की आड़ में छल नहीं चलेगा
बरखेड़ी गांव में इस घटना के बाद लोगों में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि गरीब और बीमार लोगों को लालच देकर धर्म बदलवाना मानवीयता के खिलाफ है। स्थानीय सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले की निंदा की है और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि धर्म विश्वास से अपनाया जाता है, लालच या दबाव से नहीं।