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Sehore News: हाथों में पकवान की थाली लेकर सुबह से ही मंदिर पहुंची महिलाएं, शीतला माता की पूजा कर लगाया भोग

Fri, 21 Mar 2025 11:57 AM IST
सीहोर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर

सार

शीतला सप्तमी चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की सप्तमी को मनाई जाती है। इस अवसर पर माताएं मां शीतला की पूजा अर्चना कर उन्हें शीतल भोजन का भोग लगाती हैं। घरों में महिलाएं एक दिन पहले भोजन, पकवान,आदि से खाने की वस्तुएं तैयार करती हैं।
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शीतला माता मंदिर जाती महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नए परिधान धारण कर गीत गाती माताएं और बहनें, हाथ में सजी पूजा की थाली और उसमें सजे व्यंजन। शीतला माता मंदिर की ओर बढ़ते कदम। कुछ ऐसा ही नजारा शुक्रवार को शहर के हर गली और मोहल्ले में नजर आया। 
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दरअसल, आरोग्य प्रदान करने वाली देवी शीतला माता को सप्तमी के दिन ठंडे भोजन का भोग लगाए जाने की परंपरा है। यह भोजन षष्टी के दिन बनाया जाता है और फिर सप्तमी को उसे खाया जाता है। इसी के चलते एक दिन पहले घरों से विभिन्न व्यंजनों के बनाने की महक से मानों पूरा शहर ही सुगंधित था। आज शीतला सप्तमी पर इंग्लिशपुरा स्थित हरदौल माता मंदिर, आराकश मोहल्ला गंज, अंबेडकर पार्क स्थित शीतला माता मंदिर, गल्ला मंडी स्थित शीतला माता मंदिर, कस्बा स्थित शीलता माता मंदिर पर तो मेले जैसा माहौल सुबह से नजर आया। महिलाओं ने बताया कि शीतला सप्तमी का यह पर्व होली के पर्व के बाद सप्तमी को आता है। इस दिन वे माता शीतला का पूजन अलसुबह से करना शुरू कर देती हैं। माताजी की ठंडे भोजन से पूजा की जाती हैं। माता की पूजा और भोग चढ़ाने के बाद ही घरों में भोजन किया जाता है।
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शीतला सप्तमी चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की सप्तमी को मनाई जाती है। इस अवसर पर माताएं मां शीतला की पूजा अर्चना कर उन्हें शीतल भोजन का भोग लगाती हैं। घरों में महिलाएं एक दिन पहले भोजन, पकवान,आदि से खाने की वस्तुएं तैयार करती हैं। इसके पीछे मान्यता है कि माता शांत रहे, चेचक जैसी महामारी न फैले और परिवार के सदस्य मौसमी बीमारी से बचे रहें।

सभी सनातन धर्मप्रेमी मनाते हैं शीतला माता पूजन
बुजुर्ग कमला बाई ने बताया है कि शीतला सप्तमी पर्व लगभग सभी स्थानों में सनातन धर्म प्रेमी मनाते हैं। यह पर्व चेचक जैसी बीमारी, चिकन पॉक्स यानि आम भाषा में अचपड़ा को ठीक करने, मौसमी बीमारियों और हानिकारक वैक्टीरिया से बचने के लिए मनाया जाता है। 
 

 



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