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Sehore News: किसानों की आय का मजबूत स्तंभ बनती जा रही मूंग, भैरुंदा बना हब; सात साल में दाम 1793 रुपये बढ़े

Mon, 25 Aug 2025 01:59 PM IST
सीहोर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर

सार

इस वर्ष सरकार ने 8768 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य घोषित किया, जिसके तहत 27,663 किसानों ने 77,775.21 मीट्रिक टन मूंग बेचकर 675.24 करोड़ रुपए की आमदनी हासिल की। इसमें से 615.13 करोड़ रुपए किसानों के खातों में सीधे ट्रांसफर भी किए जा चुके हैं। भैरुंदा क्षेत्र जिले का प्रमुख मूंग उत्पादन केंद्र बनकर उभरा है।
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मंडी में मूंग की खरीदारी। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिले में जायद (मूंग) की खेती ने किसानों की आर्थिक सेहत को नई ताकत दी है। बीते कुछ वर्षों में मूंग की फसल का रकबा लगातार बढ़ा है और इसका सीधा फायदा किसानों की जेब तक पहुंचा है। जहां खुले बाजार में मूंग की कीमत 5000 से 6500 रुपए प्रति क्विंटल मिलती थी, वहीं सरकार ने इस वर्ष समर्थन मूल्य पर 8768 रुपए प्रति क्विंटल में खरीदी कर किसानों को राहत दी। सात वर्षों में समर्थन मूल्य में 1793 रुपए की बढ़ोतरी ने किसानों को नई आर्थिक मजबूती दी है। यही वजह है कि मूंग अब किसानों की आय का मजबूत स्तंभ बनती जा रही है।
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7 साल में 1793 रुपए का इजाफा
यदि 2018 से 2025 तक के आंकड़े देखें तो समर्थन मूल्य पर सरकार ने कुल 1793 रुपए की बढ़ोतरी की है। वर्ष 20118-19 में सरकार ने मूंग का समर्थन मूल्य 6975 रुपए घोषित किया था। वर्ष 2019-20 में सरकार ने 75 रुपए मूल्य बढ़ाकर समर्थन मूल्य 7050 घोषित किया। वर्ष 2020-21 में केंद्र सरकार ने 146 रुपए की वृद्धि की और समर्थन मूल्य बढ़ाकर 7196 कर दिया। वर्ष 2021-22 में सरकार ने 79 रुपए दाम बढ़ाकर समर्थन मूल्य 7275 कर दिया। वर्ष 2022-23 में सरकार ने किसानों को बड़ी सौगात देते हुए सीधे 500 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की। इसके बाद सीधे समर्थन मूल्य के दाम 7775 रुपए पर पहुंच गए। वर्ष 2023-24 का साल भी किसानों के लिए खुशखबरी लेकर आया। केंद्र सरकार ने इस बार सीधे 783 रुपए समर्थन मूल्य बढ़ाकर खरीदी का रेट 8558 रुपए कर दिया। वर्ष 2024 25 में 124 रुपए के बढ़ोत्तरी का समर्थन मूल्य का दाम 8682 रुपए तक पहुंचाया। इस वर्ष 2025-26 में 86 प्रति क्विंटल का दाम बढ़ते हुए मूंग का समर्थन मूल्य 8768 घोषित हुआ। सरकार का यह कदम किसानों को उनकी मेहनत की वास्तविक कीमत दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुआ।

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किसानों की जेब में करोड़ों की आमदनी
इस साल जिले के 27,663 किसानों ने समर्थन मूल्य पर 77,775.21 मीट्रिक टन मूंग बेची। इसके एवज में उन्हें 675.24 करोड़ रुपए का भुगतान मिलना था, जिसमें से अब तक 615.13 करोड़ रुपए जारी कर दिए गए हैं। यह भुगतान किसानों के खातों में सीधे ट्रांसफर किया जा रहा है। कृषि विभाग के अनुसार करीब 32,553 किसानों ने मूंग की खरीदी के लिए पंजीयन कराया था।

विधायक भार्गव का बड़ा बयान
क्षेत्रीय विधायक रमाकांत भार्गव ने किसानों की बढ़ती आय पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की सोच है कि खेती को लाभ का धंधा बनाया जाए। इसी दिशा में समर्थन मूल्य पर खरीदी की नीति कारगर साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि मूंग ही नहीं, बल्कि चना और सोयाबीन जैसी अन्य फसलों पर भी किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ मिल रहा है। सरकार केवल समर्थन मूल्य पर खरीदी तक ही सीमित नहीं है। प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित फसलों का बीमा राशि भी सीधे किसानों के खातों में डाली जा रही है। विधायक भार्गव का कहना है कि यह प्रयास किसानों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं और खेती को जोखिम से मुक्त बनाते हैं।

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भैरुंदा बना मूंग उत्पादन का हब
जिले के भैरुंदा क्षेत्र में सबसे ज्यादा मूंग की पैदावार होती है। इस साल करीब 45,000 हेक्टेयर में किसानों ने मूंग की बोनी की। वहीं पूरे जिले में कुल 83,838.67 हेक्टेयर रकबे में मूंग का उत्पादन हुआ। महज 60 दिनों की यह फसल किसानों के लिए सोने पर सुहागा साबित हो रही है।
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615 करोड़ का भुगतान
उप संचालक कृषि अशोक कुमार उपाध्याय ने जानकारी दी कि जिले में मूंग खरीदी की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। 27,663 किसानों द्वारा बेची गई मूंग पर 675.24 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत हुई है। इसमें से 615.13 करोड़ का भुगतान हो चुका है, जबकि शेष राशि भी जल्द किसानों के खातों में ट्रांसफर की जा रही है।

खेती को लाभ का धंधा बनाने की दिशा
केंद्र और राज्य सरकार लगातार इस दिशा में काम कर रही हैं कि किसान सिर्फ गुजारे भर के लिए खेती न करें, बल्कि इसे लाभकारी व्यवसाय मानकर आगे बढ़ें। मूंग की फसल पर बढ़ा हुआ समर्थन मूल्य और समय पर भुगतान इसी नीति का हिस्सा है। कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि मूंग की खेती में भविष्य में और अधिक बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। सरकार के प्रोत्साहन और किसानों के उत्साह को देखते हुए अनुमान है कि अगले कुछ वर्षों में जिले में मूंग का रकबा कई गुना बढ़ जाएगा।
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