सीहोर की जीवनरेखा कही जाने वाली सीवन नदी सोमवार को श्रद्धा, संस्कृति और आस्था का संगम बन गई। लोक आस्था के महापर्व छठ की छटा यहां ऐसी बिखरी कि हर ओर भक्ति का सागर उमड़ आया। घाट को विशेष रूप से सजाया गया था, जहां सैकड़ों व्रती महिलाएं अपने परिवार के साथ सूर्य देव की आराधना में लीन थीं। बिजली की जगमगाहट, फलों की टोकरी, और छठी मइया के गीतों ने पूरे वातावरण को ‘मिनी बिहार’ का रूप दे दिया।
डूबते सूर्य को अर्ध्य देकर की पूजा
सोमवार की संध्या जब सूर्य धीरे-धीरे अस्ताचल की ओर बढ़ा, तब व्रती महिलाएं पारंपरिक वस्त्रों में सजकर जल में खड़ी हो गईं। उन्होंने मिट्टी के दीपक और नारियल के साथ जल से सूर्य देव को अर्ध्य अर्पित किया। इस दौरान “कांचहि बांस के बहंगिया…” और “छठी मइया दर्शन दीन्हीं ना…” जैसे पारंपरिक लोकगीत गूंज उठे। यह दृश्य इतना भावनात्मक था कि देखने वालों की आंखें स्वतः श्रद्धा से भर उठीं।
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भोजपुरी समाज ने किया भव्य आयोजन, पंडित प्रदीप मिश्रा ने दिया आशीर्वाद
भोजपुरी समाज सीहोर ने इस आयोजन को भव्य स्वरूप दिया। समाज के मीडिया प्रभारी राकेश कुमार झा ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष सफाई व्यवस्था की गई और वाटरप्रूफ टेंट लगाए गए, ताकि मौसम की अनिश्चितता का असर न पड़े। सीवन घाट पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए, जिनमें बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आयोजन में प्रसिद्ध कथावाचक प्रदीप मिश्रा समाज जनों के विशेष आग्रह पर पहुंचे और उपस्थित समाज जनों को आशीर्वाद प्रदान किया।
गन्ने के मंडप और फल-पकवानों से सजी पूजा
सोमवार की शाम व्रती महिलाओं ने गन्ने के मंडप सजाकर उसमें केले, नारियल, गुड़, ठेकुआ, और फलों की थाली रखी। सूर्य देव के डूबने से पहले सभी ने अर्घ्य देकर पूजा की और छठी मैया की कथा सुनी। कुछ महिलाओं ने दीपदान करते हुए यह प्रार्थना की कि उनके परिवार में सुख-शांति बनी रहे और संतति की आयु दीर्घ हो।
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नाक तक भरी मांग और लोकगीतों की गूंज
लोक परंपरा के अनुसार, व्रतधारी महिलाओं ने एक-दूसरे की मांग नाक तक भरी। यह प्रतीक है दीर्घ सुहाग और वैवाहिक सुख का। इस अवसर पर महिलाएं “भर दे अई छठी मइया मांग में सिंदूर…” जैसे गीत गाते हुए एक-दूसरे को आशीर्वाद देती रहीं। उनकी आस्था और समर्पण ने माहौल को और भी पवित्र बना दिया।
रातभर जागरण, सुबह उगते सूर्य को अर्ध्य
संध्या अर्ध्य के बाद श्रद्धालुओं ने भजन संध्या और सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया। रातभर सीवन घाट पर छठी मैया के गीत और भक्ति की स्वर लहरियां गूंजती रहीं। महिलाएं जागरण में मग्न होकर मंगलकामनाएं करती रहीं। छठ पर्व का समापन मंगलवार सुबह उगते सूर्य को अर्ध्य देकर होगा, जिसके साथ यह आस्था पर्व पूर्ण होगा।
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