सीहोर जिले के बहुचर्चित साहिल हत्याकांड में आखिरकार न्याय की जीत हुई। विशेष न्यायालय ने साजिद, जुबैर और आमिर को हत्या व सबूत मिटाने के अपराध में दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। यह मामला प्रेम, जलन और साजिश का खौफनाक उदाहरण बन गया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा अदालत में तीन आरोपियों को सजा सुनाई गई।
अभियोजन के अनुसार 31 दिसंबर 2023 की रात करीब 11 बजे साहिल अपने घर से यह कहकर निकला कि वह मंडी चौराहे जा रहा है। परिवार को क्या पता था कि यह उसकी आखिरी यात्रा होगी। देर रात तक जब वह नहीं लौटा, तो पिता रहमत अली ने फोन किया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई। तड़के करीब तीन बजे मोबाइल पूरी तरह बंद हो गया। अगले दिन थाना मंडी में गुम इंसान की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। दो जनवरी 2024 को कब्रिस्तान नाले के पास एक अधजली लाश मिलने से सनसनी फैल गई। मौके पर पहुंचे परिजन रहमत अली ने बेल्ट के बकल, अंगूठी और छल्ले से शव की पहचान अपने बेटे साहिल के रूप में की।
पोस्टमार्टम ने खोला राज
शव परीक्षण रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि साहिल की मौत सीने और फेफड़ों पर चाकू से किए गए कई वारों से हुई थी। इसके बाद शव को जलाकर पहचान मिटाने की कोशिश की गई थी। यह साफ था कि यह हादसा नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश थी। जांच में सामने आया कि साहिल एक युवती से मिलने गया था, जिससे साजिद भी प्रेम करता था और शादी करना चाहता था। उसी रात साजिद ने साहिल को उस लड़की से बात करते देख लिया। गुस्से और जलन में उसने जुबैर के साथ मिलकर साहिल का पीछा किया। साहिल जैसे ही कब्रिस्तान रोड की तरफ बढ़ा, साजिद और जुबैर स्कूटी से उसके पीछे पहुंच गए। वहीं नाले के पास दोनों ने चाकू से साहिल पर हमला कर दिया। लहूलुहान साहिल ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
सबूत मिटाने की साजिश
हत्या के बाद साजिद ने आमिर को बुलाया। आमिर की एक्टिवा पर शव को सुनसान नाले तक ले जाया गया। तीनों ने मिलकर साहिल के शरीर को जलाया, मोबाइल की सिम और साजिद का स्वेटर भी आग में झोंक दिया। बाइक और चाकू को पानी से भरी बाउडी में फेंक दिया गया। पुलिस ने कॉल डिटेल और टॉवर लोकेशन के आधार पर तीनों को हिरासत में लिया। पूछताछ में साजिद और जुबैर ने हत्या कबूल कर ली। उनकी निशानदेही पर खून लगी पेंट, चाकू और मोटरसाइकिल बरामद हुई। इसके साथ ही आमिर के पास से साहिल का मोबाइल बरामद हुआ। उसकी स्कूटी से फोम का टुकड़ा निकाला गया, जिस पर एफएसएल रिपोर्ट में साहिल का खून पाया गया। डॉक्टर की राय में बरामद चाकू से मौत होना संभावित बताया गया।
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डीएनए और तकनीकी साक्ष्य निर्णायक बने
मृतक के माता-पिता के रक्त नमूनों से डीएनए जांच कराई गई, जिसमें पुष्टि हुई कि शव रहमत अली और शहजादी का जैविक पुत्र साहिल ही था। कॉल डिटेल रिकॉर्ड, टॉवर लोकेशन और कैफ रिपोर्ट ने आरोपियों की मौजूदगी घटनास्थल पर सिद्ध कर दी। मामला विशेष न्यायालय प्रथम जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश स्मृता सिंह ठाकुर की अदालत में चला। अभियोजन पक्ष ने 15 गवाह पेश किए। सेवा निवृत्त डीपीओ अनिल बादल और एडीपीओ आशीष त्यागी ने सशक्त तर्क रखे, जबकि बचाव पक्ष कोई ठोस सफाई नहीं दे सका। विशेष न्यायालय ने तीनों आरोपियों को धारा 302 भादवि में आजीवन कारावास और धारा 201 में सात वर्ष के कठोर कारावास व अर्थदंड से दंडित किया। अदालत ने कहा कि यह अपराध न सिर्फ व्यक्ति के खिलाफ, बल्कि समाज की आत्मा पर भी हमला है।
परिवार को मिला न्याय, समाज को चेतावनी
साहिल के माता-पिता की आंखों में आंसू जरूर थे, लेकिन फैसले से उन्हें सुकून मिला। यह मामला एक कड़ा संदेश बन गया कि प्रेम में अंधी जलन जब अपराध में बदलती है, तो उसका अंजाम सिर्फ सलाखों के पीछे अंधेरा होता है