भैरूंदा क्षेत्र के चर्चित नकली खाद घोटाले में पुलिस ने जांच की रफ्तार बढ़ा दी है। ज्ञात रहे भैरुंदा तहसील के थाना गोपालपुर क्षेत्र में बीते दिनों नकली जैविक खाद के अवैध भंडारण और व्यवसाय का मामला सामने आया था। इस पर वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी वी.एस. राज द्वारा प्रस्तुत लिखित शिकायत के आधार पर पुलिस ने चार दिन बाद पांच लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में आपराधिक मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पांचों आरोपी अलग-अलग जिलों के रहने वाले हैं।
इनमें तेज सिंह राजपूत (नालिया खेड़ा, राजगढ़), अजय सिंह राजपूत (शमशाबाद, विदिशा), कैलाश सिंह राजपूत (विदिशा), पुष्पेन्द्र सिंह राजपूत (निमोटा) और शालिगराम (महागांव कदीम) शामिल हैं, जो सभी फिलहाल फरार हैं। पुलिस को आशंका है कि इन सभी के पीछे एक बड़े नेटवर्क का हाथ है, जो प्रदेशभर में नकली उर्वरक सप्लाई कर रहा है।
290 बोरी नकली खाद की जांच रिपोर्ट से हुआ खुलासा
टीम को सूचना मिली थी कि यहां जैविक खाद के नाम पर नकली खाद बेची जा रही है। जांच में सामने आया कि एक ट्रक से 700 बोरी खाद यहां लाई गई थी। इनमें से 500 बोरी पहले ही बिक चुकी थीं। शेष 210 बोरियां गोदाम में मिलीं, वहीं एक अन्य जगश से 80 बोरी जब्त की थीं। टीम ने खाद के जांच के लिए भेजे थे। वहीं, कार्रवाई के दौरान जो लोग खाद बेच रहे थे, वे मौके से फरार हो गए। राज्य कृषि प्रयोगशाला की रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि ‘उत्तम शक्ति पाउडर’ नामक उत्पाद पूरी तरह से नकली है। रिपोर्ट में बताया गया कि इसमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसी मूलभूत पौष्टिक तत्वों की मात्रा नगण्य है। यह किसानों की फसलों के लिए बेअसर और हानिकारक साबित हो सकता है। इस रिपोर्ट के बाद कृषि विभाग ने पुलिस कार्रवाई को और तेज करने की अनुशंसा की है।
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सप्लाई चेन पर शिकंजा
पुलिस अब नकली खाद के स्रोत और वितरण नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। प्रारंभिक पूछताछ से यह जानकारी सामने आई कि यह माल कृषि एग्रो बायो केयर प्रा. लि. के नाम से बेचा जा रहा था। इस फर्जी कंपनी के ठिकानों की तलाश में पुलिस टीमों ने सीहोर, विदिशा और भोपाल के कई स्थानों पर छापेमारी की है। साथ ही ट्रांसपोर्ट एजेंटों और बिचौलियों की भी पूछताछ जारी है। इधर, ग्राम निमोटा और महागांव कदीम के किसानों का कहना है कि उन्होंने अपने खेतों के लिए यही खाद खरीदी थी। कुछ किसानों ने इसे बोआई से पहले खेतों में डाल दिया, लेकिन फसल में कोई सुधार नहीं हुआ। किसान वीरेंद्र सिंह ने कहा, हमने अपनी मेहनत और भरोसा दोनों गंवा दिए। इस घटना ने ग्रामीण अंचल में अविश्वास और असंतोष की लहर फैला दी है।
अधिकारियों की चेतावनी,अब नहीं बख्शे जाएंगे दोषी
वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी वी.एस. राज ने स्पष्ट किया कि दोषियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318, उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 की धारा 9, 19, 28 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत कार्रवाई जारी है। उन्होंने बताया कि विभाग ने जांच पूरी कर अदालत में प्रकरण प्रस्तुत करने की तैयारी कर ली है। किसानों की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों को सख्त सजा दिलाई जाएगी। घोटाले के बाद कृषि विभाग ने सतर्क किसान, सुरक्षित खेत अभियान शुरू किया है। गांवों में शिविर आयोजित कर किसानों को असली और नकली खाद पहचानने के तरीके बताए जा रहे हैं। सरपंचों और कृषि समन्वयकों को भी लाइसेंसधारी विक्रेताओं की निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान तभी सफल होगा जब हर किसान अपने अधिकार और जिम्मेदारी को समझें।
क्या है मामला?
10 अक्तूबर की सुबह मिली सूचना पर कृषि विभाग और तहसीलदार की संयुक्त टीम निमोटा और महागांव कदीम पहुंची थी। प्रथम निरीक्षण में 80 बोरी उत्तम शक्ति पाउडर बरामद हुई, जो सरपंच की मान्यता में सुरक्षित रखी गई। तत्पश्चात निरीक्षकों ने महागांव कदीम स्थित गोदाम से 210 बोरी और जब्त कर लीं। इस प्रकार कुल 290 बोरी नकली खाद जखीरा बरामद हुआ। वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी वी.एस. राज ने शिकायत में उल्लेख किया कि उपरोक्त आरोपियों द्वारा जैविक खाद का अवैध रूप से भंडारण और व्यवसाय किया जा रहा था, जो कानूनन गलत है। घटना की जानकारी 10 अक्टूबर 2025 को सुबह 8 बजे सामने आई, जब अधिकारी ने इस संबंध में गोपालपुर थाना में शिकायत दर्ज कराई।