मूंग की फसल में इल्लियों का हमला।
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लगातार मौसम के बदलने से और हवाओं के चलने से बीते 15 दिन में दो से तीन बार मौसम बदल चुका है, जिससे मूंग फसल को बड़ा नुकसान पहुंच रहा है। पूर्व में हुई बारिश से तो किसानों को फायदा ही हुआ था, लेकिन लगातार मौसम के बदलने से अब खेतों में खड़ी मूंग की फसल को लगातार नुकसान हो रहा है। इस समय मौसम खुलते ही किसान फसल को बचाने के लिए महंगी दवाओं का छिड़काव कर रहे हैं, जिससे कि फसल में सुधार हो सके, लेकिन फिर अचानक मौसम बदलने से दवाएं बेअसर साबित हो रही हैं, जिससे किसान परेशान हैं।
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बता दें कि इस वर्ष लगभग 35 हजार हेक्टेयर में जायद फसल मूंग की बुआई की गई है। शुरुआती दौर में फसल अच्छी दिखाई दे रही थी, लेकिन इसी बीच लगातार मौसम के बदलने से मूंग फसल को भारी नुकसान हो रहा है। इस समय मूंग फसल में तंबाकू, मारूका, डायमंड ब्लैक मोथ, सेमीलूपर इल्लियों का प्रकोप अधिक देखा जा रहा है। लगातार मौसम में गर्म-ठंडे वातावरण के चलते उमस का माहौल बना हुआ है, जिससे दवाओं का छिड़काव भी बेअसर साबित हो रहा है। ऐसे में किसान परेशान हैं कि आखिर करें तो क्या करें।
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उमस और ठंडक से बढ़ी इल्लियां
कृषि विभाग की मानें तो मौसम में गर्म-ठंडक वाला तापमान होने और उमस बनने के कारण इल्लियों का अटैक बढ़ा है। खेतों में सेमीलूपर इल्ली अधिक देखी जाती थी, लेकिन इस वर्ष तंबाकू, मारूका, डायमंड ब्लैक मॉथ जैसी इल्लियां भी दिखाई दे रही हैं। कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करने के बावजूद तीन से चार दिन में फिर से खेतों में इल्ली की शिकायत मिल रही है। कई किसान को पेस्टीसाइड के अतिरिक्त बॉयोकेमिकल दवाओं और नीम तेल का भी छिड़काव कर रहे हैं, जिससे कि कुछ हद तक राहत मिल सके, लेकिन मौसम का बदलाव दवाओं का बेअसर कर रहा है।