एक पांच साल की मासूम बच्ची से हैवानियत करने के बाद भी अभियुक्त के हौसले इतने बढ़े हुए थे कि पकड़ाने पर उसने परिजनों को धमकाया और मौके से भाग निकला। करीब एक साल पुराने जघन्य एवं सनसनीखेज अपराध की श्रेणी में रखे इस मामले में विशेष न्यायालय आष्टा ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अभियुक्त को फजल अहमद को धारा-5 एम/6 पॉक्सो एक्ट में 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
विशेष लोक अभियोजक देवेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि अभियोक्त्री के पिता ने थाना सिद्धीकगंज में उपस्थित होकर 22 जून 2024 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि उसके साले की पुत्री (अभियोक्त्री) उम्र 05 साल जन्म के बाद से ही उसके पास रहती है और उसे व उसकी पत्नी को अब्बू, अम्मी कहकर बुलाती है। 22 जून 2024 को सुबह करीब 7.15 बजे उसकी पुत्री (अभियोक्त्री) एवं उसकी स्वयं की पुत्री उम्र 04 दोनों उसके घर के पास बनी फातिमा मस्जिद में पढ़ने के लिए गई थी। दोनों बच्चियां सुबह करीब 7.45 बजे जब घर वापस आई तो अभियोक्त्री रोते हुए आई थी और घबराई हुई थी।
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अभियोक्त्री के सिर पर हिजाब एवं नीचे पहना पायजामा नहीं था। अभियोक्त्री से पूछने पर उसने फरियादी एवं उसकी पत्नी को बताया कि वह तथा बहन मस्जिद में थे तो एक अंकल मस्जिद में आए और उसे पकड़कर उसका हिजाब तथा पजामा उतार दिया। इसके बाद उसके साथ गंदा काम किया और चिल्लाने पर भी नहीं माना, उस समय उसकी बहन भी सब देख रही थी।
बलात्कार के बाद बच्ची के पिता को धमकाया
अभियोक्त्री ने घटनाक्रम बताने पर फरियादी अभियोक्त्री को साथ लेकर घर के पास रोड तरफ गया जहां कुछ लोग घूम रहे थे। रोड पर ही उसके गांव का अभियुक्त फजल मोहम्मद घूम रहा था, जिसे देखकर अभियोक्त्री रोने लगी और डरकर फरियादी से चिपक गई, तब फरियादी ने अभियोक्त्री से पूछा कि इसी अंकल ने उसके साथ गलत किया है तो अभियोक्त्री ने रोते हुए बताया कि इसी अंकल ने मस्जिद में उसके साथ गलत काम किया था। तब फरियादी ने अभियुक्त फजल से पूछा कि उसने अभियोक्त्री के साथ गलत काम क्यों किया तो अभियुक्त बोला कि वह क्या कर लेगा। फरियादी, अभियुक्त को पकडऩे गया तो वह भाग गया और जाते-जाते जान से खत्म करने की धमकी दी। अन्य औपचारिक अन्वेषण पूर्ण होने के उपरांत अभियुक्त के विरूद्ध अंतिम प्रतिवेदन न्यायालय के समक्ष पेश किया गया।
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कोर्ट ने सुनाई 20 साल की सजा, दस हजार का लगाया अर्थदंड
न्यायालय द्वारा अभियोजन साक्ष्य एवं अंतिम बहस के दौरान अभियोजन के तर्को से सहमत होते हुए अभियुक्त को दोष सिद्ध पाते हुए धारा 5एम/6 पॉक्सो एक्ट में 20 साल का सश्रम कारावास एवं 10 हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया। पीडि़त के कल्याण और पुर्नवास के लिए उसे पीडि़त प्रतिकर योजना के तहत उचित प्रतिकर के रूप में चार लाख रुपए की राशि दिलाए जाने आदेशित किया गया।