सड़क किनारे नवजात का अंतिम संस्कार करता पिता।
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मध्य प्रदेश के सीहोर जिले से सामने आई यह घटना न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि इंसानियत को भी झकझोर देने वाली है। जिला अस्पताल में इलाज के दौरान चार दिन की मासूम नवजात बच्ची की मौत हो गई। जिस घर में कुछ दिन पहले किलकारियां गूंजी थीं, वहां मातम पसरा हुआ है। बच्ची की मौत से टूटे परिजनों का दर्द इतना गहरा था कि उन्होंने अपनी पीड़ा को सड़क पर उतरकर दुनिया के सामने रख दिया।
अस्पताल में क्या हुआ ?
यह मामला भेरूंदा तहसील के निवासी संतोष जाट और उनकी पत्नी ममता जाट से जुड़ा है। ममता की हालत गंभीर होने पर उन्हें भेरूंदा के सिविल अस्पताल से सीहोर जिला अस्पताल रेफर किया गया था। यहां 2 जनवरी की रात ममता ने एक प्री-मैच्योर बच्ची को जन्म दिया। महज 900 ग्राम वजन की यह बच्ची बेहद नाजुक स्थिति में थी, लेकिन परिजनों को उम्मीद थी कि डॉक्टरों की देखरेख में उनकी बेटी जिंदगी की जंग जीत लेगी। जन्म के तुरंत बाद नवजात को जिला अस्पताल के एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) में भर्ती किया गया। डॉक्टरों के अनुसार बच्ची की हालत अत्यंत गंभीर थी। लगातार इलाज और निगरानी के बावजूद पांच जनवरी की दोपहर बच्ची ने दम तोड़ दिया। यह खबर सुनते ही मां-बाप की दुनिया उजड़ गई। मां ममता बेसुध हो गईं और पिता संतोष का आक्रोश फूट पड़ा।
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ये है सड़क पर अंतिम संस्कार का कारण
बच्ची की मौत के बाद गुस्साए परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। उनका कहना था कि समय पर डॉक्टर उपलब्ध नहीं थे और स्टाफ का व्यवहार असंवेदनशील था। परिजन अस्पताल के बाहर सड़क पर बैठ गए और विरोध प्रदर्शन किया। बाद में जब परिवार भेरूंदा लौट रहा था, तभी उन्होंने सड़क पर ही अपनी मृत बच्ची का अंतिम संस्कार कर दिया। यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर गया। सड़क पर किए गए अंतिम संस्कार का वीडियो किसी ने सोशल मीडिया पर डाल दिया, जो देखते ही देखते वायरल हो गया। शुक्रवार को वायरल हो रहे वीडियो में परिजनों की बेबसी, गुस्सा और टूटा हुआ विश्वास साफ झलकता है। लोगों ने सवाल उठाए कि आखिर एक पिता को अपनी नवजात बेटी का अंतिम संस्कार सड़क पर क्यों करना पड़ा? क्या यह व्यवस्था की असफलता नहीं है?
क्या बोला अस्पताल प्रशासन ?
इस पूरे मामले पर सिविल सर्जन डॉ. उमेश श्रीवास्तव ने वस्तुस्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि बच्ची अत्यंत कम वजन की और गंभीर अवस्था में थी। परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों को गंभीरता से लेते हुए एसएनसीयू चिकित्सक और स्टाफ को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।