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सीहोर: कोसमी में आर-पार की जंग! पांच दिन के धरने के बाद अब भोपाल कूच करेंगे आदिवासी, सीएम हाउस पर दस्तक

Wed, 14 Oct 2026 11:17 PM IST
सीहोर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर

सार

सीहोर जिले के कोसमी में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के विरोध में आदिवासी परिवारों का धरना पांचवें दिन भी जारी रहा। अधिकारियों की बातचीत से समाधान नहीं निकला। प्रदर्शनकारियों ने मकान, फसल और सामान के नुकसान का मुआवजा, पुनर्वास तथा दोषियों पर कार्रवाई की मांग करते हुए भोपाल पैदल मार्च की चेतावनी दी। 
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बुधवार को संभागायुक्त कर्मवीर शर्मा, कलेक्टर बालागुरु के., पुलिस अधीक्षक सोनाक्षी सक्सेना और अन्य अधिकारी कोसमी पहुंचे।
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विस्तार
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सीहोर जिले के कोसमी में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर भड़का आदिवासी आक्रोश अब भोपाल तक पहुंचने की तैयारी में है। पांच दिन से धरने पर बैठे प्रभावित परिवारों और प्रदर्शनकारियों का गुस्सा शांत नहीं हुआ है। बुधवार को भोपाल संभागायुक्त कर्मवीर शर्मा, कलेक्टर बालागुरु के. और पुलिस अधीक्षक सोनाक्षी सक्सेना सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालने और आंदोलन समाप्त कराने की कोशिश की, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका।

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अब प्रदर्शनकारियों ने गुरुवार सुबह आठ बजे कोसमी से भोपाल तक पैदल मार्च निकालने की चेतावनी दी है। आंदोलनकारियों के अनुसार, इस मार्च में हजारों महिला-पुरुष और बच्चे शामिल हो सकते हैं। कुछ नेताओं ने संख्या 10 से 15 हजार तक पहुंचने का दावा किया है। उनकी मांग है कि प्रभावित परिवारों को न्याय, उचित मुआवजा और जीवनयापन के लिए जरूरी सहायता मिले।

पांच दिन से धरना, फिर भी नहीं निकला समाधान
कोसमी में वन विकास निगम की कार्रवाई के बाद उपजा विवाद लगातार गंभीर होता जा रहा है। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान उनके मकान तोड़े गए, फसलों को नुकसान पहुंचा और उनके सामने रहने तथा आजीविका का संकट खड़ा हो गया। इसी के विरोध में आदिवासी समाज के लोग धरने पर बैठे हैं। पांच दिन गुजरने के बाद भी आंदोलनकारियों और प्रशासन के बीच सहमति नहीं बन सकी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अपनी मांगों पर स्पष्ट आश्वासन चाहते हैं। केवल बातचीत और जांच की प्रक्रिया बताने से उनका संकट दूर नहीं होगा। इसी नाराजगी के बीच अब आंदोलन को राजधानी तक ले जाने की रणनीति बनाई गई है।
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अधिकारियों की पंचायत में जाने से इनकार, धरना स्थल पर बुलाया
बुधवार को संभागायुक्त कर्मवीर शर्मा, कलेक्टर बालागुरु के., पुलिस अधीक्षक सोनाक्षी सक्सेना और अन्य अधिकारी कोसमी पहुंचे। प्रशासन की कोशिश थी कि प्रभावित परिवारों से बातचीत कर विवाद के समाधान का रास्ता निकाला जाए। हालांकि, पीड़ित परिवार ने अधिकारियों की पंचायत में जाने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि जिन्हें बात करनी है, वे धरना स्थल पर आएं। इसके बाद एसडीएम सुधीर कुशवाह और थाना प्रभारी ने समझाइश दी। समझाने पर दो लोग ग्राम पंचायत भवन पहुंचे और अधिकारियों के सामने अपनी बात रखी। इसके बावजूद बातचीत किसी निर्णायक नतीजे तक नहीं पहुंच सकी। प्रदर्शनकारियों की नाराजगी बनी रही और भोपाल कूच का ऐलान दोहराया गया।

संभागायुक्त ने मौके पर देखी स्थिति, शासन को भेजेंगे रिपोर्ट
संभागायुक्त कर्मवीर शर्मा ने कोसमी पहुंचकर वन क्षेत्र से हटाए गए अतिक्रमण की वस्तुस्थिति का जायजा लिया। उन्होंने प्रभावित परिवारों से चर्चा की और बाद में ग्राम पंचायत भवन में संबंधित परिवारों तथा अन्य लोगों से मामले के विभिन्न पहलुओं की जानकारी ली। इस दौरान कलेक्टर बालागुरु के., पुलिस अधीक्षक सोनाक्षी सक्सेना, एसडीएम सुधीर कुशवाह सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। संभागायुक्त के मुताबिक, शासन की ओर से मामले की जांच की जा रही है। प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करने और संबंधित लोगों से बातचीत के बाद तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी। अतिक्रमण से जुड़े पहलुओं के साथ यह भी पता लगाया जा रहा है कि संबंधित परिवारों के पास गांव में रहने के लिए कोई दूसरी जगह है या वे इसी भूमि पर निर्भर हैं। हालांकि, जांच और रिपोर्ट की प्रक्रिया से नाराज प्रदर्शनकारी तत्काल राहत और स्पष्ट कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं।

मकान, फसल और सामान के नुकसान की भरपाई की मांग
आदिवासी समाज ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखने की बात कही है। पहली, कार्रवाई के दौरान यदि अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए। दूसरी, प्रभावित और बेघर परिवारों के लिए आश्रय, भोजन तथा चिकित्सा की व्यवस्था की जाए। तीसरी, तोड़े गए मकानों, नष्ट हुई फसलों और क्षतिग्रस्त सामान का उचित मुआवजा दिया जाए। प्रभावित परिवारों का कहना है कि नुकसान के बाद उनके सामने परिवार पालने और दोबारा जीवन शुरू करने की चुनौती खड़ी हो गई है। आंदोलनकारियों के मुताबिक, जब तक उनकी समस्याओं पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक धरना समाप्त करने का सवाल नहीं उठता।

मुख्यमंत्री निवास तक पहुंचने की चेतावनी, न्याय मिलने तक संघर्ष
आदिवासी नेता रमेश बारेला ने कहा कि समाज अब अपनी मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई लड़ने के मूड में है। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे मुख्यमंत्री से सीधे मुलाकात कर अपनी पीड़ा और मांगें सामने रखना चाहते हैं। प्रदर्शनकारियों ने गुरुवार सुबह आठ बजे पैदल मार्च शुरू करने की चेतावनी दी है। उनके दावों के मुताबिक, मार्च में पांच हजार लोगों के शामिल होने की संभावना है और रास्ते में दूसरे लोगों के जुड़ने से संख्या 10 से 15 हजार तक पहुंच सकती है। हालांकि, वास्तविक भागीदारी की पुष्टि मार्च शुरू होने के बाद ही होगी। आंदोलनकारियों का स्पष्ट संदेश है कि प्रभावित परिवारों को न्याय और राहत मिलने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
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प्रशासन के सामने चुनौती, आंदोलन को शांतिपूर्ण रखने की जिम्मेदारी
कोसमी का विवाद अब केवल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है। यह प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, मुआवजे, जवाबदेही और प्रशासन पर भरोसे का सवाल बन गया है। एक ओर प्रशासन तथ्यों की जांच कर रिपोर्ट शासन को भेजने की बात कह रहा है, तो दूसरी ओर आंदोलनकारी तत्काल राहत और स्पष्ट आश्वासन चाहते हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है। विवाद के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच और प्रभावित परिवारों की जायज समस्याओं का समयबद्ध समाधान। प्रस्तावित भोपाल मार्च के मद्देनजर यह भी जरूरी होगा कि आंदोलन शांतिपूर्ण रहे और महिलाओं, बच्चों तथा बुजुर्गों की सुरक्षा का ध्यान रखा जाए। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों पर क्या कदम उठाती है और क्या राजधानी कूच से पहले या उसके बाद इस विवाद का कोई ठोस रास्ता निकल पाता है।

 

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