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Sehore: गुप्त नवरात्रि जारी, रविवार को होगा पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण

Sat, 02 Jul 2022 02:30 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर

सार

मंदिर के व्यवस्थापक मेवाड़ा ने बताया कि रविवार को मंदिर परिसर में पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण किया जाएगा। 
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विश्रामघाट मां चौसठ योगिनी मरीह माता मंदिर में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि आस्था और उत्साह के साथ मनाई  जा रही है। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सीहोर शहर के विश्रामघाट मां चौसठ योगिनी मरीह माता मंदिर में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि आस्था और उत्साह के साथ मनाई  जा रही है। नवरात्रि के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने पंडित उमेश दुबे और मंदिर के व्यवस्थापक गोविन्द मेवाड़ा के मार्गदर्शन में यज्ञ में आहुतियां दी गईं। शुक्रवार को ब्रह्माचारिणी मां का आह्वान किया गया।
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मंदिर के व्यवस्थापक मेवाड़ा ने बताया कि रविवार को मंदिर परिसर में पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण किया जाएगा। सुनील चौकसे, राकेश शर्मा, रोहित मेवाड़ा, रितेश अग्रवाल, कृष्णा मेवाड़ा आदि ने दुर्गा सप्तशती का पाठ के पश्चात पूजा-अर्चना के साथ आरती की। 

शुक्रवार की सुबह पंडित दुबे ने यहां पर मौजूद श्रद्धालुओं को बताया कि नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना का विधान है। देवी दुर्गा का यह दूसरा रूप भक्तों एवं सिद्धों को अमोघ फल देने वाला है। देवी ब्रह्मचारिणी की उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है। मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से मनुष्य को सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है तथा जीवन की अनेक समस्याओं एवं परेशानियों का नाश होता है। देवी ब्रह्मचारिणी का स्वरूप पूर्ण ज्योतिर्मय है। मां दुर्गा की नौ शक्तियों में से द्वितीय शक्ति देवी ब्रह्मचारिणी का है। 
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पंडित जी ने बताया कि ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली अर्थात तप का आचरण करने वाली मां ब्रह्मचारिणी। यह देवी शांत और निमग्न होकर तप में लीन है। मुख पर कठोर तपस्या के कारण तेज और कांति का ऐसा अनूठा संगम है जो तीनों लोकों को उजागर कर रहा है। देवी ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में अक्ष माला है और बाएं हाथ में कमण्डल होता है। देवी ब्रह्मचारिणी साक्षात ब्रह्म का स्वरूप हैं अर्थात तपस्या का मूर्तिमान रूप हैं।
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