मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में तीसरी कक्षा की छात्रा से दुष्कर्म करने वाले दोषी को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने टिप्पणी में कहा कि समाज में ऐसी गंदगी फैलाने वालों को आजीवन दंड मिलना ही चाहिए।
नाबालिगों के साथ लगातार बढ़ रही दुष्कर्म की घटनाओं के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश रविंद्र शर्मा ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि दुष्कर्म की घटना से स्त्री का पूरा जीवन प्रभावित हो जाता है। इसलिए ऐसे मामलों में आरोपी पर किसी भी तरह की उदारता दिखाना न्यायोचित नहीं है। ऐसे आरोपियों को तो आजीवन दंड मिलना आवश्यक है। न्यायाधीश ने जून 2023 में आठ वर्षीय नाबालिग बालिका के साथ हुई घटना के मामले में आरोपी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा दी। उन्होंने आदेश में कहा कि पीड़िता के साथ न्याय होना चाहिए। उन्होंने जिला विधिक प्राधिकरण सीहोर को इस मामले में लेख करते हुए पीड़ित को उचित पुनर्वास व उचित प्रतिकर दिए जाने की बात कही है।
मामले की जानकारी देते हुए विशेष लोक अभियोजन शिरीष उपासनी ने बताया कि अपर सत्र न्यायाधीश रविंद्र कुमार शर्मा ने बड़ा फैसला सुनाते हुए नाबालिग के साथ दुष्कर्म करने वाले दोषी को आजीवन जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया। उन्होंने बताया कि बीते 7 से 19 जून के बीच आरोपी सचिन कोरकू पिता गयाप्रसाद (24)निवासी ग्राम बालागांव थाना नसरुल्लागंज जिला सीहोर को दोषी पाते हुये धारा 376 (AB) भादवि एवं धारा पॉक्सो एक्ट में आजीवन कारावास, जो शेष संपूर्ण जीवन काल के लिए होगा एवं 500-500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया।
अपराधी द्वारा कक्षा तीसरी में अध्ययन कर रही 8 वर्षीय बालिका को 20 रुपए का लालच देकर अपने साथ घर ले गया। जहां नाबालिग के साथ गलत काम किया। नाबालिग को लगातार दर्द हुआ, तो उसे जान से मारने की धमकी भी दी। न्यायाधीश शर्मा ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि इस तरह के मामले में आरोपी को दंडित किया जाना आवश्यक है, जिससे समाज में ऐसी गंदगी फैलाने वालों को सबक मिल सके।