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Rudraksh Mahotsav: सीहोर के कुबेरेश्वरधाम में पहुंचे मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पंडित प्रदीप मिश्रा को लेकर कही

Mon, 16 Feb 2026 09:46 PM IST
सीहोर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर

सार

सीहोर के कुबेरेश्वर धाम में शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन हजारों श्रद्धालु उमड़े। प्रदीप मिश्रा ने सच्ची भक्ति, कर्म और शिव स्मरण का संदेश दिया। कार्यक्रम में कैलाश विजयवर्गीय शामिल हुए। आगामी दिनों में धीरेंद्र शास्त्री सहित अन्य संतों का आगमन प्रस्तावित है। 
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सीहोर कुबेरेश्वरधाम पहुंचे मंत्री कैलाश विजयवर्गीय - फोटो : x@@panditmishraji
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विस्तार
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सीहोर स्थित कुबेरेश्वर धाम में आयोजित सात दिवसीय शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक प्रदीप मिश्रा के भावपूर्ण प्रवचनों ने भक्तों को दिखावे से दूर सच्ची भक्ति का मार्ग बताया। सोमवार को पूरा क्षेत्र शिवमय दिखाई दिया। भगवा ध्वज, रुद्राक्ष मालाएं और “हर हर महादेव” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। रुद्राक्ष महोत्सव के अंतर्गत आयोजित कथा में देशभर से हजारों श्रद्धालु पहुंचे।

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“दुनिया नहीं, परमात्मा पर भरोसा करो”
व्यासपीठ से संबोधित करते हुए पंडित मिश्रा ने कहा कि हम दुनिया पर भरोसा करते हैं, पर परमात्मा पर नहीं। उन्होंने कहा कि बाबाओं के चक्कर में पड़कर लोग ईश्वर को भूल जाते हैं, जबकि सच्ची शरण केवल भगवान शिव की है। दिखावा भक्ति को अधूरा बना देता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रतिदिन श्रद्धा से शिवलिंग पर एक लोटा जल अर्पित करने और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र जपने की सलाह दी। उनके अनुसार शिव स्मरण जीवन की कठिनाइयों को सरल बना देता है।

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मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पहुंचे
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सहित कई जनप्रतिनिधि शामिल हुए। उन्होंने कहा कि सीहोर आज पंडित मिश्रा की भक्ति के कारण वैश्विक पहचान बना रहा है। पंडित मिश्रा ने बताया कि शिव बाहर नहीं, हर मनुष्य के भीतर हैं। उन्होंने कहा कि दूसरों के चरण छूने से पहले स्वयं के भीतर स्थित शिवत्व को पहचानें। एक महिला के पत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने विश्वास की शक्ति पर जोर दिया और कहा कि जहां विज्ञान की सीमा समाप्त होती है, वहां आस्था की शुरुआत होती है।
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मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित के अनुसार मंगलवार को धीरेंद्र शास्त्री धाम पहुंचेंगे। 19 फरवरी को देवकीनंद ठाकुर तथा 20 फरवरी को कौशिक महाराज कथा में शामिल होंगे। आयोजन समिति ने इसे सनातन धर्म के लिए ऐतिहासिक अवसर बताया।

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