मरीह माता मंदिर में जलाए जाएंगे दीप (फाइल फोटो)
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सीहोर जिले में पितृ मोक्ष अमावस्या के मौके पर रविवार को जिला संस्कार मंच के तत्वाधान में शहर के विश्राम घाट स्थित मरीह माता मंदिर में हवन और दीप प्रज्जवलन कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। पंडित प्रदीप मिश्रा के आह्वान पर मंच द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।
श्राद्ध पक्ष के मौके पर गौशाला में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। गुरुवार को जिला संस्कार मंच के संस्थापक मनोज दीक्षित ने बताया कि रविवार को पितृमोक्ष अमावस्या पर मंच और मरीह माता मंदिर के व्यवस्थापक रोहित मेवाड़ा ने बताया कि रविवार को सुबह हवन का आयोजन किया जाएगा और उसके पश्चात दीप प्रज्जवलित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि शास्त्रों में ऐसे देवलोक गमन करने वाले पितरों के निमित्त इसी दिन तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने का उल्लेख है। सभी चाहते हैं कि उनके पितृ खुश होकर रवाना हों और उनके निमित्त वह जो अनुष्ठान कर रहे हैं, वह भी मंगलकारी हो। संयोगवश पितृ- मोक्ष अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि, रवि, बुधादित्य और कन्या राशि में चतुर्ग्रही योग का सहयोग रहेगा। इन योगों के चलते किए कर्मकांड शुभ फलदायी रहेंगे, पितरों के निमित्त सर्वाधिक कर्मकांड 25 सितंबर को पितृमोक्ष अमावस्या पर होंगे। इस दिन ऐसे लोग भी अपने उन पूर्वजों के निमित्त तर्पण और पिंडदान व श्राद्ध कर सकते हैं जिनकी तिथि उन्हें ज्ञात नहीं है। जो लोग समयाभाव के कारण पूरे पितृपक्ष में तर्पण नहीं कर पाते हैं, वे अमावस्या पर कर सकते हैं।
पितरों की शांति के लिए श्राद्ध कर्म अवश्य किया जाना चाहिए। इससे उनकी आत्मा को शांति मिलती है और वह अपने वंश को आशीर्वाद देते हैं। मान्यता है कि हिंदू धर्म में किसी की मृत्यु के बाद उस व्यक्ति का श्राद्ध किया जाता है जो जरूरी होता है। इसलिए पितृ पक्ष का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। मान्यता है कि पितृ पक्ष में यमराज पितरों को अपने परिजनों से मिलने के लिए मुक्त कर देते हैं। 15 दिवस तक पितृ धरती पर रहते हैं, इस दौरान यदि पितरों का श्राद्ध न किया जाए तो वह नाराज हो जाते हैं।