सीहोर में स्वास्थ्य विभाग और बिजली कंपनी सहित विभिन्न विभागों में करीब आठ हजार आउटसोर्स कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। थोड़े से रुपयों के लिए आउटसोर्स कर्मचारी महीने भर जी-जान से अपने काम को करते हैं। लेकिन जब वेतन की बारी आती है तो एक तारीख की जगह 15 से 20 तारीख हो जाती है। इसके चलते आउटसोर्स कर्मचारियों को इधर-उधर से उधारी लेकर अपना काम चलाना पड़ता है।
आउटसोर्स कर्मचारियों की माने तो प्रदेश भर में आउटसोर्स कर्मचारियों को एक तारीख को वेतन मिल जाता है। लेकिन सीहोर जिले में ये व्यवस्था नहीं है। जिले में महीने की एक तारीख के स्थान पर 15 से 20 तारीख वेतन मिलने में लग जाती है। इसके चलते आउटसोर्स कर्मचारी आर्थिक रूप से विभिन्न परेशानियों का सामना करने पर मजबूत रहते हैं। लेकिन वह चाहकर भी अपनी समस्या किसी अधिकारी के समक्ष नहीं रख सकते हैं। एक कर्मचारी ने बताया कि मुंह खोला तो समझो नौकरी गई। इसके चलते मुंह बंदकर परेशानियों के बीच अपना काम करते रहते हैं।
जिले में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को कलेक्ट्रेट रेट भी नहीं दिए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के एक कर्मचारी ने बताया कि अगस्त 2019 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इन कर्मचारियों को रोगी कल्याण समिति से हटाकर आउटसोर्स कर्मचारी बना दिया था। तब सरकार ने इन कर्मचारियों को कलेक्टर रेट के आधार पर प्रतिमाह 10,600 रुपये वेतन देने की घोषणा की थी। लेकिन कर्मचारियों का आरोप है कि आउटसोर्स कंपनी इन्हें 10,600 रुपये की जगह 5,000 से 8,500 रुपये प्रतिमाह ही वेतन ही देती है। इसके चलते कर्मचारी परेशान हो रहे हैं।
क्यों नहीं काटा जा रहा पीएफ
जिले में आउटसोर्स कर्मचारियों की एक अन्य समस्या पीएफ काटने की भी है। कर्मचारियों की माने तो सरकारी और निजी उपक्रमों में कार्य करने वाले कर्मचारियों की पीएफ राशि काटी जाती है, ताकि भविष्य में इस राशि का उपयोग कर्मचारी कर सकें। लेकिन जिले में ऐसा नहीं हो रहा है। आउटसोर्स कर्मचारियों की पीएफ राशि का भी कोई प्रावधान नहीं है, बस काम किए जाओ।
कई कर्मचारियों को दो महीने से नहीं मिला वेतन
आउटसोर्स कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष अरविंद शर्मा ने बताया कि जिले में करीब आठ हजार आउटसोर्स कर्मचारी विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं। जिले में आउटसोर्स कर्मचारियों की सबसे बड़ी समस्या वेतन समय पर नहीं मिलने की है। प्रदेश भर में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों की महीने की एक तारीख को वेतन मिल जाता है। लेकिन सीहोर में कर्मचारियों को वेतन मिलते-मिलते 15 से 20 तारीख हो जाती है। जिले में कार्यरत कई कर्मचारियों को तो दो महीने से वेतन नहीं मिला है।