सीहोर जिले के ग्राम बरखेड़ी में अवैधानिक रूप से संचालित मुस्कान अस्पताल के संचालक अशोक विश्वकर्मा के विरुद्ध कोतवाली थाना सीहोर में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। हैरानी की बात ये है कि पूर्व में इस अस्पताल को 12 दिसंबर 2024 को अनेक अनियमितताओं के कारण सील किया जा चुका है, इसके बावजूद भी यह अस्पताल अवैधानिक रूप से संचालित किया जा रहा था। स्वास्थ्य विभाग द्वारा बुधवार को इस अस्पताल को पुन: सील कर दिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीएमएचओ कार्यालय से मुस्कान अस्पताल की दूरी महज 10 किलोमीटर थी, बावजूद इसके विभाग को पता नहीं चला कि बंद किया गया अस्पताल फिर से संचालित हो रहा है। यह लापरवाही केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि एक ऐसी भूल है, जिसने एक मासूम की जान ले ली। सवाल उठता है कि 10 महीने तक विभाग सोया क्यों रहा?
सीएमएचओ डॉ. सुधीर कुमार डेहरिया ने बताया कि 12 दिसंबर 2024 को अनेक अनियमितताओं के कारण अस्पताल को बंद किया गया था, लेकिन संचालक अशोक विश्वकर्मा ने इसे फिर से अवैध रूप से शुरू कर दिया। विभाग की टीम ने मौके पर जांच की और पाया कि अस्पताल के पास कोई वैध अनुमति नहीं थी। इसके बाद बुधवार को स्वास्थ्य विभाग ने दोबारा अस्पताल को सील कर दिया।
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मौत के बाद हड़कंप, डॉक्टर परिवार समेत फरार
घटना के बाद से ही आरोपी डॉक्टर और उसका परिवार फरार है। स्थानीय लोगों के अनुसार, घटना की जानकारी मिलते ही डॉक्टर ने क्लिनिक पर ताला लगा दिया और रातों-रात गांव छोड़ दिया। कोतवाली थाना प्रभारी रविंद्र यादव ने बताया कि पुलिस ने अस्पताल परिसर की तलाशी ली और सीसीटीवी फुटेज तथा दवाओं के रिकॉर्ड जब्त किए हैं। बच्ची का पोस्टमॉर्टम कराया गया है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सीएमएचओ ने बनाई जांच समिति
सीएमएचओ डॉ. सुधीर कुमार डेहरिया ने घटना की गंभीरता को देखते हुए पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति में वरिष्ठ चिकित्सक, बीएमओ डॉ. नवीन मेहर और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. जेपी परमार को शामिल किया गया है। समिति को आदेश दिया गया है कि वे 24 घंटे के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करें। सीएमएचओ ने यह भी स्पष्ट किया कि अस्पताल को पहले सील करने के बाद बिना अनुमति दोबारा खोलना गंभीर अपराध है।
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परिवार की चीखें और न्याय की उम्मीद
दीक्षा की मौत के बाद से परिवार गहरे सदमे में है। मां बदहवास हालत में बार-बार यही कहती रही, “हम तो इलाज कराने गए थे, हमारी दीक्षा को मार दिया।” गजराज कुशवाह व परिजनों ने अस्पताल संचालक और स्वास्थ्य विभाग दोनों पर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जब पहले अस्पताल बंद किया गया था, तो प्रशासन ने यह सुनिश्चित क्यों नहीं किया कि वह दोबारा न खुले। गांव में ग़म और गुस्से का माहौल है।
जांच में पूरा मामला
बीएमओ डॉ. नवीन मेहर की रिपोर्ट पर बुधवार देर शाम कोतवाली थाना सीहोर में डॉक्टर अशोक विश्वकर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने विभिन्न धाराओं और चिकित्सा अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। सीसीटीवी फुटेज और जब्त इंजेक्शनों की जांच फोरेंसिक टीम को भेजी गई है। जिला प्रशासन ने कहा है कि यदि जांच में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही साबित होती है, तो संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी।
इस तरह चला घटनाक्रम
घटना सीहोर जिले के ग्राम पिपलिया मीरा की है। यहां रहने वाले कन्हैयालाल कुशवाहा अपनी बेटी दीक्षा (2) को सर्दी-बुखार होने पर ग्राम बरखेड़ी में मुस्कान क्लिनिक पर लाए थे। यहां डॉक्टर अशोक विश्वकर्मा ने बच्ची को चेक किया था। परिजन का आरोप है कि डॉक्टर ने बच्ची को इंजेक्शन लगाया था, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई। परिजन बच्ची को जिला अस्पताल सीहोर ले गए। यहां से उसे हमीदिया अस्पताल भोपाल रेफर कर दिया गया, लेकिन परिजनों ने उसे भोपाल के मनन चाइल्ड केयर हॉस्पिटल, लालघाटी में भर्ती कराया। यहां डॉक्टरों ने बच्ची की हालत नाजुक बताई। इलाज के दौरान उसे होश नहीं आया। मंगलवार सुबह बच्ची की मौत हो गई।
मुस्कान अस्पताल के बाहर लगी भीड़
दीक्षा