छात्रा ममता की आठवीं की अंकसूची में जानकारी सही है, पर नौवीं की अंकसूची में गलती हुई है।
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मार्कशीट में भी गड़बड़ी, परिणाम पर उठे सवाल
ममता की मार्कशीट सिर्फ जन्मतिथि की गलती तक सीमित नहीं है। दस्तावेजों पर नजर डालें तो परिणामों में भी गंभीर विसंगतियां सामने आती हैं। मार्कशीट के अनुसार छात्रा को थ्योरी के सभी मुख्य विषयों में अनुपस्थित दिखाया गया है, जबकि इसके बावजूद प्रैक्टिकल और पुराने वेटेज के आधार पर 50 अंक जोड़कर उसे फेल घोषित कर दिया गया। पिता ने बताया कि छात्रा प्रेक्टिकल के लिए भी नहीं गई थी। यह सवाल खड़ा करता है कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने बिना जांच-पड़ताल के ही दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर दिए। इस लापरवाही ने छात्रा के पूरे शैक्षणिक सत्र को खतरे में डाल दिया है।
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एक साल से दफ्तरों के चक्कर, पिता की नहीं सुनवाई
गरीब आदिवासी पिता तेर सिंह बरेला पिछले एक साल से स्कूल, विकासखंड कार्यालय और शिक्षा विभाग के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने विकासखंड शिक्षा अधिकारी, एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर प्राचार्य और अन्य दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। तेर सिंह का कहना है कि हर बार उन्हें आश्वासन मिलता है, लेकिन सुधार आज तक नहीं हुआ। जानकारों का कहना है कि यदि यह त्रुटि पोर्टल के माध्यम से हुई है तो जिला शिक्षा केंद्र के स्तर पर इसे सुधारा जा सकता है, लेकिन देरी छात्रा के भविष्य को और नुकसान पहुंचा सकती है।
आदिवासी बेटी का भविष्य खराब, आंदोलन की चेतावनी
मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के आदिवासी विभाग महासचिव सुमित नर्रे ने इस मामले को लापरवाही की पराकाष्ठा बताया है। उन्होंने कहा कि जिस बेटी का जन्म 2009 में हुआ, उसे स्कूल ने 1899 की छात्रा बना दिया, यह आदिवासी परिवारों के प्रति सिस्टम की संवेदनहीनता दर्शाता है। नर्रे ने तहसीलदार और जिला शिक्षा अधिकारी से तत्काल सुधार और दोषी प्राचार्य व परीक्षा प्रभारी पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो रानी दुर्गावती सेना और कांग्रेस आदिवासी विभाग उग्र आंदोलन करेगा। वहीं विकासखंड शिक्षा अधिकारी साक्षी जैन ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद जांच के निर्देश दिए गए हैं और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।