फैसला विशेष न्यायाधीश संजय कुमार शाही की अदालत ने सुनाया। उन्होंने अभियुक्तगण पूनमचंद्र पिता गंगाधर विश्वकर्मा, ओमवती पति पूनमचंद्र विश्वकर्मा नि. बैरागढ़ भोपाल, उमेश नंदन प्रसाद सिन्हा पिता बी.एन.पी. सिन्हा नि. कान्हा कुंज, भोपाल को धारा 420 भादवि एवं 13(1) डी/13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में 5-5 वर्ष सश्रम कारावास एवं 2000-2000 के अर्थदण्ड से दण्डित किया।
मीडिया सेल प्रभारी केदार कौरव ने बताया कि 21 मार्च 2013 को आरोपी पूनमचंद्र विश्वकर्मा एवं उसकी पत्नी ओमवती ने यूको बैंक की शाखा ग्राम खण्डवा, जिला सीहोर में लोन राशि प्राप्त करने के लिए आवेदन दिया और यूको बैंक के तत्कालीन शाख प्रबंधक यूएनपी सिन्हा ने साढ़े सात लाख रुपये का भूमि के विक्रय पत्रक की सत्यापित प्रति रखकर लोन स्वीकृत कर दिया, जबकि लोन संबंधित नियम के तहत राशि प्राप्त करने के लिए भूमि के विक्रय पत्र की मूल प्रति/असल प्रति बैंक में रखा जाना आवश्यक था, किन्तु तीनों आरोपीगण द्वारा आपराधिक षड्यंत्र कर भूमि के मूल दस्तावेज गांरंटी के रूप में नहीं रखे।
आरोपी पूनमचंद्र और ओमवती ने लोन राशि चुकता किए बिना पुन: पंजाब नेशलन बैंक, शाखा दोराहा में लोन के लिए आवेदन कर दिया। पंजाब नेशनल बैंक से भी 10 लाख रुपये की राशि आरोपीगण ने प्राप्त कर ली। पंजाब नेशलनल बैंक में भूमि के विक्रय पत्र की मूलप्रति रखी गई। इस प्रकार तीनों आरोपीगण द्वारा आपराधिक षड़यंत्र कर यूको बैंक के साथ राशि साढ़े सात लाख लोन राशि के रूप में और ब्याज सहित कुल दस लाख 60 हजार रुपये की धोखाधड़ी कर ली गई।
फरियादी संभागीय प्रबंधक, यूको बैंक द्वारा जांच पश्चात आर्थिक अपराध शाखा भोपाल में सूचना दी गई। प्रारंभिक जांच पश्चात ई. ओ. डब्ल्यू. शाखा, भोपाल द्वारा प्रकरण पंजीबद्ध किया गया। अनुसंधान पश्चात् आरोपीगण के विरूद्ध धारा 420, 120 बी भादवि एवं 13(1) डी/13(2) भृष्टाचार निवारण अधिनियम का अभियोग पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। शासन की ओर से रेखा यादव, एडीपीओ एवं प्रमोद अहिरवार, सहायक जिला अभियोजन अधिकारी, सीहोर द्वारा पैरवी की गई।