Sehore: जिले में गोशालाएं भगवान भरोसे चल रही हैं।
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बैरसिया में हुए गायों की मौत के बाद सरकार का ध्यान गोशालाओं की तरफ पूरी तरह से नहीं गया है। गोशालाओं में सरकार की अनदेखी की परतें लगातार खुल रही हैं। जिले में अधिकतर गोशालाओं को महिलाओं के स्व-सहायता समूह के भरोसे हैं। वहीं कई गोशालाएं बजट के अभाव में अब तक शुरू ही नहीं हो सकी हैं।
जिले में स्वीकृत गोशालाओं में से एक तिहाई गोशाला दो साल में भी तैयार नहीं हो पाई हैं, वहीं जो हेंडओवर हो गई हैं, वह बजट के अभाव में बदहाली का शिकार है। कई जगह जनसहयोग से गोशालाएं संचालित हो रही हैं, तो जो बजट पर निर्भर है, वहां कई खामियों के चलते मवशियों से लेकर इनका संचालन करने वाले भी परेशान नजर आ रहे हैं। यही कारण है कि हाईवे सहित मुख्य मार्गों पर गायों के झुंड विचरण करते व बैठे हुए नजर आ रहे हैं, जो भूखे-प्यासी बदहाल स्थिति में हैं, वहीं आए दिन गाय दुघर्टना का शिकार भी हो रही हैं।
64 में से 18 में ही पानी की व्यवस्था
जानकारी अनुसार जिले भर में कुल स्वीकृत 64 गोशालाओं में से 18 में पानी की व्यवस्था है। जबकि 25 में पानी टंकी का निर्माण किया गया है, वहीं 15 गोशालाओं में बिजली की व्यवस्था है, तो वहीं 15 गोशालाओं का संचालन शुरू किया गया है, जिनमें 1332 गाय को रखा गया है। इनके चरागाह की व्यवस्था की बात करें तो हालात बदत्तर हैं। क्योंकि जिले भर में 55 चरागाह 1 करोड़ 76 लाख से स्वीकृत किए गए हैं, जिसमें 149 हेक्टेयर में गायों को चरने के लिए चारा लगाया जाना था। इनमें से 21 में बोवनी का काम शुरू हुआ है, लेकिन अभी तक चार में ही चारा की बोवनी की गई है, लेकिन एक भी चरागाह पूरी तरह से बनकर तैयार नहीं हो सका है। जबकि 17 लाख रुपये राशि खर्च की जा चुकी है। इस मामले को लेकर परियोजना अधिकारी मनरेगा प्रमोद त्रिपाठी का कहना है कि समय-समय पर बजट आवंटित होता है। उसी अनुरूप जारी कर दिया जाता है।