सीहोर जिला अस्पताल ने कोरोना से मृत सैकड़ों लोगों की लाशों को ढोने वाले और अंतिम संस्कार करने वाले दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को बिना पूर्व सूचना के हटा दिया है।
मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों ने कलेक्टर को अपनी व्यथा सुनाई और कहा की जिला चिकित्सालय ट्रामा सेंटर में रोगी कल्याण समिति कि ओर से सपोर्टिंग स्टॉफ के रूप में पांच साल से ज्यादा समय से काम कर रहे हैं। दैनिक वेतन भोगियों ने कहा कि कोरोनाकाल में हमने अपनी जान जोखिम में डालकर अपनी सेवाएं दी, हमें बिना पूर्व सूचना के ही सिविल सर्जन डॉ अशोक मांझी ने सेवा से बेदखल कर दिया है। सिविल सर्जन हमें निकाल कर अपने चहेते अनुभवहीन लोगों को काम पर रख रहे हैं।
दैनिक वेतन भोगियों का कहना है कि जानबूझकर अनुभवी व्यक्तियों को हटाया जा रहा है। अस्पताल की अव्यवस्थाओं को बढ़ाया जा रहा है। अस्पताल में नौकरी देने के नाम पर भी कमिशन खोरी की जा रही है कमिशन खोरी का मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।
सिविल सर्जन ने अपने निजि स्वार्थ के लिए शुभ कंपनी बुंदेलखण्ड को टेण्डर दिया है। कंपनी का एरिया मैनेजर जाहिद खान एवं सिविल सर्जन डॉ. अशोक मोझी में सांठगाठ चल रही है। अस्पताल के कर्मचारियों ने मामले की जांच कराया जाने और रोगी कल्याण समिति के हटाए गए सभी कर्मचारियों को वापस सेवा में लेने की मांग जिला प्रशासन से की।