फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सीहोर: बाघों की भूख मिटाने खिवनी अभयारण्य में छोड़े 42 चीतल, पलायन से रोकने की कवायद

Sun, 03 Apr 2022 01:34 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर

सार

वन विभाग द्वारा खिवनी अभयारण्य को नेशनल पार्क के रूप में विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। इसके तहत प्रबंधन वन्य प्राणियों खासकर बाघों के संरक्षण तथा उनके संवर्धन के लिए तेजी से कदम उठा रहा है। अभयारण्य में मौजूद करीब आधा दर्जन से अधिक बाघों की भोजन की पर्याप्त उपलब्ता के लिए हाल ही में 42 चीतलों का एक झुंड जंगल में छोड़ा गया है।
विज्ञापन
सीहोर जिले में स्थित खिवनी अभयारण्य के बाघों की भूख मिटाने के लिए वन विभाग ने 42 चीतलों का एक झुंड जंगल में छोड़ा है। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सीहोर जिले में स्थित खिवनी अभयारण्य के बाघों की भूख मिटाने के लिए वन विभाग ने 42 चीतलों का एक झुंड जंगल में छोड़ा है। ये चीतल नेशनल पार्क वन विहार भोपाल से लाई गई हैं। अभी 58 चीतलों की दूसरी खेप आना बाकी है। इसके साथ ही शाकाहारी जंतुओं को भोजन की उपलब्धता के लिए जंगल में जगह-जगह भूसा डलवाया जा रहा है ताकि कोई भी वन्य प्राणी भोजन की तलाश में अभयारण्य से पलायन न कर सके।
विज्ञापन

 
गौरतलब है कि वन विभाग द्वारा खिवनी अभयारण्य को नेशनल पार्क के रूप में विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। इसके तहत प्रबंधन वन्य प्राणियों खासकर बाघों के संरक्षण तथा उनके संवर्धन के लिए तेजी से कदम उठा रहा है। अभयारण्य में मौजूद करीब आधा दर्जन से अधिक बाघों की भोजन की पर्याप्त उपलब्ता के लिए हाल ही में 42 चीतलों का एक झुंड जंगल में छोड़ा गया है। ये चीतलें भोपाल के नेशनल पार्क वन विहार से लाई गई हैं। इसके साथ ही 58 चीतलों की एक खेप और लाई जाएगी। जिसकी इसी वर्ष आने की उम्मीद है। जंगल में चीतलों की मौजूदगी से बाघों को शिकार की तलाश में रहवासी क्षेत्र में प्रवेश करने अथवा पलायन की संभावनाओं में कमी हो सकेगी। रेंजर मिश्रा ने बताया कि अभयारण्य में बड़ी संख्या में वन्य प्राणी एवं आधा दर्जन से अधिक बाघ मौजूद हैं। इनके अलावा कई दुर्लभ पक्षीयों के साथ ही करीब 155 प्रजाति के पक्षियों को भी यहां देखा गया है।
 
शाकाहारी जंतुओं को भोजन की उपलब्धता के लिए जंगल में कई स्थानों पर भूसा डाला जा रहा है ताकि वन्य जीवों को भोजन की तलाश में इधर-उधर भागना या पलायन न करना पड़े। दरअसल अभयारण्य में पिछले एक माह से लगातार आगजनी हो रही है। इसके चलते वनस्पति और घास आदि जलकर नष्ट हो गए हैं। ऐसे में वन्य प्राणियों के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया है। वे भोजन की तलाश में रहवासी क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं जहां उनका शिकार हो रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें