बीते दिनों सागर जिले के बंडा-शाहगढ़ क्षेत्र में अपमिश्रित शराब पीने से कई लोगों की मौत के बाद प्रदेश में नकली और अपमिश्रित शराब की जांच के लिए पुलिस पूरी तरह सक्रिय है। इसी क्रम में सतना जिले में आबकारी विभाग की टीम ने शराब की अवैध बिक्री से जुड़े कथित रैकेट का खुलासा किया है। विभाग के अनुसार ब्रांडेड विदेशी शराब की खाली बोतलों में संदिग्ध तरल भरकर ग्राहकों को सप्लाई किए जाने की जानकारी सामने आई है।
आबकारी विभाग ने डिकॉय ऑपरेशन के जरिए पहले डिलीवरी एजेंट सुनील कुशवाहा को पकड़ा, फिर उसकी निशानदेही पर देर रात घूरडांग निवासी जितेंद्र कुमार शाह उर्फ रवि को गिरफ्तार किया गया। विभाग उसे नेटवर्क का मास्टर माइंड बता रहा है। विभाग के अनुसार जब्त बोतल पर मंकी शोल्डर ब्रांड का लेबल लगा था। बोतल के अंदर मौजूद तरल की प्रारंभिक जांच में कुछ संदिग्ध तत्व मिले हैं। इसमें सूक्ष्म कण और तैलीय तत्व होने की जानकारी सामने आई है। नमूना FSL जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बोतल में मौजूद तरल किस प्रकार का था।
मोबाइल से ऑर्डर, एजेंट से डिलीवरी
विभाग की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कथित नेटवर्क मोबाइल फोन के जरिए संचालित किया जा रहा था। ग्राहकों से फोन पर संपर्क कर शराब के ऑर्डर लिए जाते थे और डिलीवरी के लिए एजेंट का इस्तेमाल किया जाता था। विभाग के मुताबिक एक बार में तीन-चार बोतल ही पहुंचाई जाती थीं, ताकि बड़ी मात्रा में शराब के साथ पकड़े जाने का खतरा कम रहे।
डिकॉय ऑपरेशन से पकड़ा गया एजेंट
आबकारी विभाग को मुखबिर से अपमिश्रित शराब की बिक्री की सूचना मिली थी। सूचना की पुष्टि के बाद टीम ने ग्राहक बनकर शराब खरीदने की योजना बनाई। 14 सितंबर की रात शहर के सेमरिया चौक स्थित हैदराबादी बिरयानी सेंटर के पास एजेंट को डिलीवरी के लिए बुलाया गया। सुनील कुशवाहा वहां पहुंचा और शराब की बोतल देने लगा। इसी दौरान सादे कपड़ों में मौजूद आबकारी उप निरीक्षक संजय साकेत ने उसे पकड़ लिया।
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घूरडांग में दबिश, मुख्य आरोपी गिरफ्तार
डिलीवरी एजेंट से पूछताछ के बाद आबकारी टीम ने कथित मास्टर माइंड जितेंद्र कुमार शाह उर्फ रवि के घूरडांग स्थित घर पर देर रात दबिश दी। विभाग के मुताबिक कार्रवाई की भनक लगने पर आरोपी ने मोबाइल फोन सहित कुछ सामग्री हटाने का प्रयास किया लेकिन टीम ने उसे पकड़ लिया।
जिला आबकारी अधिकारी सुरेंद्र कुमार उरांव ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, शराब की सप्लाई के स्रोत और ग्राहकों तक पहुंचाई गई बोतलों के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच के बाद मामले में और खुलासा होने की उम्मीद है।
इन धाराओं में कार्रवाई
आबकारी विभाग ने मामले में अपराध क्रमांक 374/26 दर्ज किया है। आरोपियों के खिलाफ मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा 34(1)(क) और 49(क) के तहत कार्रवाई की गई है। विभाग के अनुसार मामला अपमिश्रित मदिरा से जुड़ा होने के कारण गंभीरता से जांच की जा रही है। दोनों आरोपियों को मंगलवार को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
कलेक्टर सतीश कुमार एस के निर्देशन में आबकारी उपायुक्त माधव सिंह भेड़िया और सहायक आबकारी आयुक्त सुरेंद्र कुमार उरांव के मार्गदर्शन में कार्रवाई की गई। आबकारी उप निरीक्षक आशीष बारिया के नेतृत्व में उप निरीक्षक संजय साकेत, मुख्य आरक्षक राजकरण त्रिपाठी, मंगलदीन कोल, शंकर दयाल प्रजापति, आरक्षक आशुतोष तिवारी, अमृता उरमलिया सहित अन्य स्टाफ कार्रवाई में शामिल रहा।
अब आबकारी विभाग FSL रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। टीम यह पता लगाने में जुटी है कि बोतल में मौजूद संदिग्ध तरल कहां तैयार किया जाता था, नेटवर्क में और कौन लोग शामिल हैं और अब तक कितनी बोतलें ग्राहकों तक पहुंचाई गईं।