सागर में लोडिंग में ऑक्सीजन सिलिंडर लगाकर लाए गए मरीज
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सागर जिले में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का एक झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। समय पर 108 एंबुलेंस न मिलने के कारण परिजनों को दो गंभीर मरीजों—जिनमें एक 85 वर्षीय बुजुर्ग और दूसरा जहर खाया युवक शामिल था—को मालवाहक (लोडिंग ऑटो) में लादकर जिला अस्पताल पहुंचाना पड़ा। वाहन में ऑक्सीजन सिलिंडर तो बांध दिया गया, लेकिन साथ में कोई मेडिकल स्टाफ नहीं भेजा गया।
घंटों इंतजार के बाद भी नहीं पहुंची एंबुलेंस
मामला शाहपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) का है। जानकारी के अनुसार, 85 वर्षीय दुली अहिरवार को सीने में तेज दर्द और सांस लेने में गंभीर तकलीफ के चलते अस्पताल लाया गया था। डॉक्टरों ने मरीज की नाजुक हालत को देखते हुए रात में ही जिला अस्पताल रेफर कर दिया। मरीज के परिजनों का आरोप है कि 108 सेवा पर कॉल करने के बाद घंटों इंतजार किया गया, लेकिन कोई एंबुलेंस नहीं पहुंची।
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डॉक्टर ने कहा- 'अपने साधन से ले जाओ'
परिजनों के मुताबिक, स्थिति बिगड़ती देख ड्यूटी डॉक्टर ने खुद के साधन से मरीज को ले जाने की बात कही। मजबूरी में तीमारदारों ने एक मालवाहक (लोडिंग ऑटो) की व्यवस्था की। अस्पताल प्रबंधन ने औपचारिकता निभाते हुए एक ऑक्सीजन सिलेंडर तो थमा दिया, जिसे लोडिंग ऑटो के कोने में बांधा गया, लेकिन रास्ते में निगरानी के लिए किसी भी स्वास्थ्यकर्मी या वार्ड बॉय को साथ नहीं भेजा।
रास्ते में ही खत्म हो गई ऑक्सीजन
हैरानी की बात यह रही कि जिला अस्पताल पहुंचते-पहुंचते सिलेंडर की ऑक्सीजन पूरी तरह खत्म हो गई। यदि रास्ते में मरीज की हालत और बिगड़ती तो अप्रिय घटना घट सकती थी।
एक ही मालवाहक में पहुंचे दो गंभीर मरीज
इसी लोडिंग वाहन में एक अन्य गंभीर युवक को भी शाहपुर से सागर लाया गया, जिसने कथित तौर पर जहर खा लिया था। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से रेफर किए जाने के बाद दोनों ही मरीजों के परिजनों को जान जोखिम में डालकर मालवाहक का सहारा लेना पड़ा। जहर खाने वाले युवक को बाद में बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है।
लोडिंग वाहन में मरीज