पांच फीट लंबे शिलापट्ट पर उकेरे गए तीन अलौकिक दृश्य
क्षीरसागर में शेषशायी विष्णु: प्रथम दृश्य में भगवान विष्णु क्षीरसागर (8 लहरों के रूप में चित्रित) में 7 फणों वाले शेषनाग की शय्या पर लेटे हैं। नाभि-कमल पर ब्रह्मा जी और चरणों में माता लक्ष्मी विराजित हैं, जबकि वासुदेव और देवकी हाथ जोड़कर विष्णुधर्मोत्तर पुराण की परंपरा के अनुसार स्तुति करते दिख रहे हैं।
माता रोहिणी का वात्सल्य:
तीसरे दृश्य में लेटी हुई माता रोहिणी नवजात बलराम को स्तनपान करा रही हैं। उनका सिर माता यशोदा की गोद में है। पास ही नंद बाबा, वृद्ध सेविका और सुंदर आभूषणों-केशविन्यास से सजी नारी आकृतियों के साथ संपूर्ण नंदगांव का मनमोहक वातावरण उकेरा गया है।
भारतीय कला और विज्ञान का अनमोल साक्ष्य
एरण पुरास्थल से पहले भी बलराम जी की हल और सुरा-पात्र (मदिरा) धारण की हुई गुप्तकालीन प्रतिमाएं मिल चुकी हैं। हालांकि, यह नया शिलापट्ट यह साबित करता है कि 1700 साल पहले भी भारतीय शिल्पकला में पौराणिक कथाओं के साथ-साथ गूढ़ जैविक प्रक्रियाओं को उकेरने की अद्भुत क्षमता थी। इतिहास और संस्कृति के शोधकर्ताओं के लिए यह खोज एक अनमोल धरोहर बन गई है।