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Sagar News: काले हिरण शिकार मामले में नया मोड़, पूछताछ में संगठित नेटवर्क के संकेत; मास्टरमाइंड की तलाश तेज

Sat, 13 Dec 2025 09:15 PM IST
सागर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर

सार

Blackbuck Poaching Case Update: सागर में काले हिरण शिकार मामले की जांच में संगठित वन्यजीव अपराध नेटवर्क के संकेत मिले हैं। पूछताछ में मास्टरमाइंड की भूमिका सामने आई है, जो फरार है। बैंक खातों और कॉल डिटेल्स की जांच जारी है।
 
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काले हिरण के शिकार मामले में नया मोड़ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सागर में काले हिरण के शिकार से जुड़े हाई-प्रोफाइल मामले में वन विभाग और एसटीएफ को मिली चार दिन की फॉरेस्ट रिमांड पूरी हो गई है। इस दौरान की गई गहन पूछताछ में कई अहम और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिनसे यह मामला अब केवल एक घटना न रहकर संगठित वन्यजीव अपराध नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है।

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मास्टरमाइंड की भूमिका पर फोकस
जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि पूरे शिकार प्रकरण का संचालन किसी और के इशारे पर किया जा रहा था, जो फिलहाल फरार है। वन विभाग ने उसकी गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग टीमें गठित कर दी हैं और संभावित ठिकानों पर दबिश की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी से पूरे नेटवर्क की परतें खुल सकती हैं।
 
लालच में दी जाती थी हिरणों की जानकारी
गिरफ्तार आरोपी ओमकार और राजू आदिवासी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वे पैसे और शराब के लालच में इस अपराध में शामिल हुए थे। जंगल की भौगोलिक जानकारी का फायदा उठाकर वे काले हिरणों की मूवमेंट और लोकेशन मास्टरमाइंड तक पहुंचाते थे। इसके बदले उन्हें हर बार 500 से 1000 रुपये नकद और शराब की बोतल दी जाती थी।
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डॉ. वसीम खान की पूछताछ में खुलासे
मुख्य आरोपी डॉ. वसीम खान से सख्ती से पूछताछ के दौरान यह सामने आया कि वह दो अन्य लोगों के इशारे पर राहतगढ़ क्षेत्र में शिकार करने आया था। उसने यह भी बताया कि इस इलाके में पहले भी कई लोग काले हिरण का शिकार कर चुके हैं, जिससे नेटवर्क की जड़ें गहरी होने की पुष्टि होती है। पूछताछ में यह भी सामने आया कि शिकार वाले दिन वह लगातार दो संदिग्ध लोगों से फोन पर संपर्क में था, जिनकी कॉल डिटेल्स की जांच की जा रही है।

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पैसे के लेनदेन की जांच तेज
वन विभाग को आशंका है कि इस पूरे नेटवर्क में नियमित रूप से पैसों का लेनदेन होता रहा है। इसी कड़ी में आरोपियों के बैंक खातों की जांच शुरू कर दी गई है। संबंधित बैंकों को आधिकारिक पत्र भेजकर लेनदेन से जुड़ी पूरी जानकारी मांगी गई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शिकार से जुड़े पैसे किन-किन माध्यमों से और किन लोगों तक पहुंचे।
 
अधिकारियों के संकेत, जांच जारी
वन विभाग के ट्रेनी आईएफएस अधिकारी जयप्रकाश ने बताया कि मामला अभी पूरी तरह सुलझा नहीं है। उनके अनुसार पूछताछ में सामने आए तथ्यों से स्पष्ट है कि इसमें और भी लोग शामिल हैं। आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना है। फिलहाल वन विभाग और एसटीएफ इस मामले को एक बड़े वन्यजीव अपराध नेटवर्क के रूप में देख रही है और आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।


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