सागर-गढ़ाकोटा मार्ग पर सनोदा चौराहे पर पिछले छह घंटे से चक्काजाम रहा। चिलचिलाती धूप में भी लोग टस से मस नहीं हुए। सड़क जाम की वजह से बड़े वाहन चालक यहां पर फंसे रहे और दोनों तरफ लंबी कतार लग गई। नन्ही मासूम बच्ची की बॉडी को लेकर सड़क पर बैठे लोग कलेक्टर और विधायक को मौके पर बुलाने की मांग कर रहे थे। स्थानीय लोगों के साथ यहां पर अहिरवार महापंचायत और भीम आर्मी के पदाधिकारी भी डटे रहे।
इधर, सीएसपी नीलम चौधरी और एसडीएम अदिति यादव भी मौके पर पहुंचे और चक्काजाम में बैठे लोगों को लगातार समझने के प्रयास किए। लेकिन उनका कहना है या तो डॉक्टर को हटाने और स्टाफ पर कार्रवाई करने का आदेश दिखा दीजिए, नहीं तो कलेक्टर और विधायक को मौके पर बुलाइए, तभी वह जाम हटाएंगे। सानोदा पुलिस के साथ बहेरिया और मकरोनिया की पुलिस भी मौके मौजूद रही।
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बच्ची के पिता अरुण अहिरवार ने बताया कि 19 मार्च को डेढ़ साल की बेटी सौम्या को निमोनिया होने पर बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था। जहां एसएनसीयू में इलाज चल रहा था।रविवार को वार्ड में मौजूद स्टॉफ ने बच्ची के पास ब्लोअर हीटर लगा दिया, लेकिन परिजन को कोई जानकारी नहीं दी गई। इससे बच्ची का पैर झुलस गया और उसकी मौत हो गई। आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही के कारण बेटी की जान चली गई है। मामले का विरोध किया तो अस्पताल के सुरक्षाकर्मियों ने बदसलूकी की।
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घटना से नाराज परिजन ने सागर-गढ़ाकोटा मार्ग पर सोमवार सुबह करीब नौ बजे से चक्काजाम कर दिया। देखते ही देखते लोगों की भीड़ लग गई। सूचना पर सानौधा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। लोगों को समझाइश दी। नरयावली विधायक प्रदीप लारिया ने सहायता का आश्वासन दिया। वहीं, सागर कमिश्नर ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई, तब जाकर चक्काजाम खत्म हुआ।