प्रदेश में मानव तस्करी के एक बड़े मामले का भंडाफोड़ हुआ है। अंत्योदय एक्सप्रेस से गुजरात ले जाए जा रहे 26 नाबालिग बच्चों को मक्सी और उज्जैन स्टेशन पर रेस्क्यू किया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इन बच्चों को बचाने के लिए सागर की बाल कल्याण समिति (CWC) और किशोर न्याय बोर्ड (JJB) के सदस्य खुद ट्रेन में सवार होकर बच्चों को चिह्नित करते रहे, लेकिन सागर और बीना जीआरपी ने कार्रवाई करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई।
क्या है पूरा मामला?
बाल संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य ओमकार सिंह को सूचना मिली थी कि मुजफ्फरनगर से अहमदाबाद जा रही अंत्योदय एक्सप्रेस में करीब 100 नाबालिग बच्चों को बाल श्रम के लिए ले जाया जा रहा है। सूचना पर सीडब्ल्यूसी और जेजेबी के सदस्य शाम 5:30 बजे सागर स्टेशन पहुंचे। उन्होंने बोगियों में बच्चों को अकेला और संदिग्ध अवस्था में देखा।
पुलिस का टालमटोल रवैया
जब समिति के सदस्यों ने सागर जीआरपी से बच्चों को उतारने के लिए कहा, तो पुलिस ने 'फोर्स की कमी' और 'समय के अभाव' का बहाना बनाकर हाथ पीछे खींच लिए। पुलिस ने आश्वासन दिया कि बीना स्टेशन पर कार्रवाई की जाएगी। समिति के सदस्य वंदना तोमर और चंद्रप्रकाश शुक्ला खुद ट्रेन में सवार होकर बच्चों की निगरानी करते हुए बीना तक गए। बीना स्टेशन पर पुलिस बल तो मौजूद था, लेकिन अधिकारियों ने ट्रेन के अंदर जाकर सर्चिंग करने के बजाय समिति के सदस्यों से ही पूछताछ में समय निकाल दिया और ट्रेन आगे बढ़ गई।
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उज्जैन में चला बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन
सागर-बीना में पुलिस की विफलता के बाद उज्जैन पुलिस को अलर्ट किया गया। रात 11 बजे उज्जैन और मक्सी स्टेशनों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। यहां शुरुआती जांच में 4 बच्चों को उतारा गया। सीएसपी दीपिका शिंदे के नेतृत्व में ट्रेन को नागदा स्टेशन पर रुकवाकर एक घंटे सर्चिंग की गई, जहां 22 और बच्चे मिले।
बड़े गिरोह की आशंका
रेस्क्यू किए गए 26 बच्चों को फिलहाल उज्जैन जीआरपी की सुरक्षा में रखा गया है। इनमें से दो बच्चों की उम्र 14 साल से भी कम है। श्रम विभाग की सहायक आयुक्त राखी जोशी के अनुसार, जानकारी 100 बच्चों की थी, लेकिन पुलिस को केवल 26 ही मिल पाए। आशंका जताई जा रही है कि बाकी बच्चों को पुलिस की सुस्ती का फायदा उठाकर बीच के स्टेशनों पर उतार दिया गया या वे ट्रेन में ही छिपे रह गए।
इस रेस्क्यू में बाल आयोग के पूर्व सदस्य ओमकार सिंह, वंदना तोमर, चंद्रप्रकाश शुक्ला, भगवतशरण बनवारिया, अनिल रैकवार और उज्जैन सीएसपी दीपिका शिंदे सहित सामाजिक संस्थाओं (KSS, संकल्प, आवास) के कार्यकर्ताओं का विशेष योगदान रहा।