कटनी में प्रदर्शन करते मृतक के परिजन।
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आप ने गब्बर इज बैक फिल्म तो देखी होगी, जिसमें मुर्दे के इलाज के नाम पर भारी लूट की जाती है। कुछ ऐसा ही आरोप मध्यप्रदेश के कटनी जिले में मंगतराम हॉस्पिटल पर लगा है। आरोप है कि मुर्दे का इलाज किया गया और मृतक के परिजनों से मोटी रकम ऐंठकर गंभीर हालत बताते हुए दूसरे अस्पताल रैफर कर दिया।
जब परिजन मरीज को लेकर दूसरे अस्पताल पहुंचे तो वहां बताया गया कि मरीज की काफी देर पहले मौत हो चुकी है। दरअसल, लक्ष्मी विश्वकर्मा का इलाज उमरिया के जिला अस्पताल में हुआ था। मंगतराम अस्पताल के डॉ. लालवानी ने बताया कि उमरिया के बाद मरीज को कटनी लाया गया। जिला अस्पताल में इलाज कराया गया, वहां भी स्थिति नहीं सुधरी तो यहां लाया गया। रविवार को हमारे यहां एडमिट कराया गया। हमने जो भी दवा हो सकती थी, की थी। बाहर से डॉक्टर को भी बुलाया था। तब हमने ही सजेस्ट किया था कि धर्मलोक अस्पताल ले जाओ, वहां वेंटिलेटर है। वहां और बेहतर इलाज हो सकता है। मरीज के परिजन 32 हजार रुपये लेने का आरोप लगा रहे हैं, वह गलत है। 10-12 हजार रुपये जरूर खर्च हुए हैं। लक्ष्मी विश्वकर्मा के पति का आरोप है कि मंगतराम अस्पताल से जब हम मरीज को लेकर धर्मलोक अस्पताल पहुंचे तो वहां बताया गया कि इसकी मौत काफी देर पहले हो चुकी है। यहां ऑक्सीजन मास्क लगाकर दूसरे अस्पताल भेजा गया। इसका मतलब यह है कि यहां मुर्दों का इलाज हो रहा था।
अस्पताल के सामने हंगामा
कोतवाली पुलिस के टीआई अजय सिंह ने कहा कि शव का पीएम करवा लिया गया है। रिपोर्ट का इंतजार है। उसमें ही पता चलेगा कि मरीज की मौत कब हुई और डॉक्टरों की लापरवाही है या नहीं। तब तक के लिए हमने मर्ग कायम कर लिया है। इस बीच, लक्ष्मी विश्वकर्मा के परिजन उसका शव लेकर अस्पताल के सामने पहुंच गए। वहां शव रखा और चक्काजाम किया। पुलिस को वहां पहुंचकर परिजनों को शांत करना पड़ा। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग पीएम रिपोर्ट के बाद ही कोई कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं।
बहन के साथ मारपीट का आरोप
घटना के बाद विश्वकर्मा समाज के लोगों ने मंगतराम हॉस्पिटल के सामने रखकर प्रदर्शन किया। मृतका की बहन रूबी ने अस्पताल प्रबंधन पर मारपीट का आरोप लगाया है। उसके हाथ की नस कट गई, जिससे उसका काफी खून बह गया है। उसे जबलपुर रैफर किया गया है। युवती का बयान लेने के लिए नायब तहसीलदार भी पहुंचे थे।