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मोहन सरकार के दो साल: रीवा-सीधी-सिंगरौली-सतना बेल्ट में ऊर्जा, निवेश और सड़कों पर सरकार का फोकस

Sat, 13 Dec 2025 06:34 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रीवा/भोपाल

सार

MP Govt Ke 2 Saal: सरकार ने दो साल में विंध्य–बघेलखंड क्षेत्र को उद्योग, ऊर्जा और कनेक्टिविटी का केंद्र बनाने पर जोर दिया है। निवेश, सोलर और सड़क परियोजनाओं से विकास की संभावनाएं बढ़ीं, हालांकि कुछ योजनाओं पर सवाल और विरोध भी सामने आए हैं।
 
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मध्य प्रदेश सरकार के दो साल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्य प्रदेश सरकार ने अपने दो साल के कार्यकाल में विंध्य–बघेलखंड क्षेत्र को विकास के नए केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में कई अहम घोषणाएं और परियोजनाएं सामने रखी हैं। रीवा, सीधी, सिंगरौली और सतना को फोकस में रखते हुए उद्योग, निवेश, ऊर्जा और सड़क कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार ने वर्ष 2025 को ‘उद्योग और रोजगार का वर्ष’ घोषित करते हुए प्रदेशभर में 4 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों का लक्ष्य तय किया है, जिसमें रीवा–सिंगरौली–कटनी बेल्ट को कोयला, पावर और सोलर इंडस्ट्री हब के रूप में चिन्हित किया गया है।

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औद्योगिक पार्क और नई नीतियां
मुख्यमंत्री की इंडस्ट्री पॉलिसी के तहत अब तक लगभग 33 हजार हेक्टेयर भूमि पर 139 औद्योगिक पार्क विकसित किए जा चुके हैं। इनमें विंध्य–बघेलखंड क्षेत्र का भी हिस्सा शामिल है, जहां पावर, सीमेंट और माइनिंग आधारित इकाइयों को प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार की घोषणा के अनुसार इनमें से अधिकांश प्लांट सिंगरौली जिले में स्थापित होने हैं, हालांकि इनके लिए विस्तृत रोडमैप अभी तैयार नहीं हुआ है। फरवरी 2024 में प्रधानमंत्री मित्रा टेक्सटाइल पार्क जैसे औद्योगिक पार्कों की भी घोषणा की गई थी।
 
रीवा और आसपास के क्षेत्रों में विकास कार्य
मुख्यमंत्री के रीवा दौरे के दौरान ट्योंथर और मऊगंज क्षेत्र में 160 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण किया गया। इन कार्यों में सड़क, पेयजल, सार्वजनिक सुविधाएं और इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट शामिल हैं। सरकार इन क्षेत्रों को बघेलखंड में नई औद्योगिक वृद्धि के संभावित नोड के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
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ग्लोबल इंवेस्टर समिट और निवेश दावे
नई सरकार के कार्यकाल में भोपाल में आयोजित ग्लोबल इंवेस्टर समिट में कुल 30.77 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों के लिए एमओयू साइन होने का दावा किया गया। इस समिट में रिलायंस, अदाणी ग्रुप और एनटीपीसी सहित कई बड़े कॉर्पोरेट समूहों ने लगभग 4 लाख करोड़ रुपये के बड़े निवेश प्रस्ताव दिए। इनमें पावर, रिन्यूएबल एनर्जी, मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रमुख सेक्टर रहे। इन प्रस्तावों का बड़ा हिस्सा सिंगरौली और मऊगंज जिलों से जुड़ा बताया गया है, जहां एक बड़े एनर्जी हब के निर्माण की योजना है। इसके तहत सिंगरौली में बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई भी हो रही है, जिसका स्थानीय जनता और कांग्रेस नेताओं ने विरोध किया है।
 
ऊर्जा और खनन क्षेत्र पर जोर
सरकारी आंकड़ों के अनुसार निवेश प्रस्तावों का बड़ा हिस्सा ऊर्जा और माइनिंग सेक्टर में है। इससे सिंगरौली को कोल और पावर हब, रीवा को सोलर हब और सतना को सीमेंट उद्योग के केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। सिंगरौली नगर निगम अध्यक्ष देवेश पांडे के अनुसार जिले के विकास के लिए कई रोडमैप तैयार किए गए हैं, जिनसे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य को अधिक राजस्व मिलने की उम्मीद है।
 
आने वाले बड़े प्रोजेक्ट और ऊर्जा विस्तार
रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क के बाद अब 170 मेगावाट का नया सोलर प्रोजेक्ट निजी कंपनी वाआरी एनर्जी द्वारा विकसित किया जा रहा है। इससे रीवा की कुल सोलर क्षमता 750 मेगावाट से आगे बढ़ने की दिशा में है। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के अनुसार, रीवा में ऊर्जा के नए स्रोत विकसित किए जा रहे हैं ताकि रोजगार के साथ-साथ प्रदेश का राजस्व भी बढ़े और खाली जमीन व पहाड़ों का उपयोग ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जा सके।



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लॉजिस्टिक और इंडस्ट्रियल कनेक्टिविटी
राज्य सरकार ने सिंगरौली और कटनी में इनलैंड कंटेनर डिपो बनाने की घोषणा की है। इससे कोयला, खनिज और औद्योगिक उत्पादों की रेल और पोर्ट कनेक्टिविटी मजबूत होगी। केंद्र और राज्य की संयुक्त योजनाओं के तहत रीवा–सिंगरौली बेल्ट में कोल आधारित पावर, सीमेंट और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के साथ नए इंडस्ट्रियल क्लस्टर विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
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सड़क विकास: प्रगति और सवाल
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मध्यप्रदेश के लिए 60 हजार करोड़ रुपये से अधिक की सड़क परियोजनाओं की घोषणा की है। इनमें सतना–चित्रकूट और रीवा–सीधी फोर लेन जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। कांग्रेस के जिला अध्यक्ष ज्ञान सिंह ने सीधी जिले की सड़क को लेकर सवाल उठाते हुए बताया कि इसके टेंडर कई बार निरस्त हुए और भूमि पूजन के बावजूद सड़क अब तक पूरी नहीं हो सकी है। वहीं रीवा–सीधी सेक्शन में बनी सुरंग और बायपास से दूरी करीब सात किलोमीटर कम हुई है और यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आने की बात कही जा रही है। अधिवक्ता अंबुज पांडे के अनुसार इस सुरंग से क्षेत्र को बेहतर सुविधा मिली है। रीवा–सतना, देवतालाब–नैगड़ी और सतना–बेला मार्गों के चौड़ीकरण से कोल, सीमेंट, डायमंड और पर्यटन क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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