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प्रमोशन में आरक्षण मामला: नरोत्तम मिश्रा बोले- सरकार कर्मचारी हितों का ध्यान रखेंगी, अजाक्स पदाधिकारी ने फैसले को राज्य सरकार और संगठन की जीत बताया  

Sat, 29 Jan 2022 02:49 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

राज्य सरकार कर्मचारी संगठनों की रणनीति के पहले ही अपनी रणनीति बनाने में जुट गई है। गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने शुक्रवार को कहा कि विधि विशेषज्ञों से कोर्ट के फैसले को लेकर सलाह ले रहे हैं। राज्य सरकार कर्मचारी हितों का ध्यान रखेगी। 
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मध्य प्रदेश के गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रमोशन में आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट के शुक्रवार को आए फैसले के बाद राज्य सरकार कर्मचारी संगठनों की रणनीति के पहले ही अपनी रणनीति बनाने में जुट गई है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग के अधिकारी कर्मचारियों के प्रमोशन में आरक्षण संबंधी फैसले में केंद्र पर सरकार के पाले में गेंद डाल देने के बाद मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। राज्य सरकार के प्रवक्ता गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने शुक्रवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हम स्वागत करते हैं और विधि विशेषज्ञों से कोर्ट के फैसले को लेकर सलाह ले रहे हैं। मिश्रा ने यह भी कहा कि राज्य सरकार कर्मचारी हितों का ध्यान रखेगी। सरकार कर्मचारियों के साथ है। वहीं,अब दूसरी तरफ प्रमोशन में आरक्षण को लेकर गठित मंत्री समूह की अगली बैठक 2 फरवरी को मंत्रालय में होने वाली है। इस बैठक में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार के अगले कदम पर चर्चा होने की संभावना है। वहीं,  कर्मचारी संगठनों ने भी कोर्ट के फैसले के बाद सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। 
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अजाक्स के जनरल सेक्रेटरी एसएल सूर्यवंशी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया है कि प्रमोशन में आरक्षण का पैमाना सरकार तय करे। संविधान भी यहीं कहता है। यह पैमाना पहले तय है। 24 फरवरी से होने वाली सुनवाई में इस पर अंतिम निर्णय हो जाएगा। सूर्यवंशी ने कहा कि दूसरा सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण का रिव्यू कितने साल में होना चाहिए यह भी सरकार को तय करने को कहा है, जो कि सरकार पहले से ही तय करते आ रही है। कैडर के अनुसार डाटा होना चाहिए। इसका सरकार डाटा तैयार करके सुप्रीम कोर्ट में फाइल कर चुकी है। हमारी रणनीति यह है कि हम कोर्ट में साबित करेंगे कि पदोन्नति नियम 2002 सही है। सूर्यवंशी ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की थी कि आरक्षण हर हाल में जारी रहेगा। अजाक्स प्रदेश सरकार के सुप्रीम कोर्ट के वकील मनोज बोरकेला से बनाए नियम को लागू करने की मांग की है। 

क्या है मामला 
मध्य प्रदेश सरकार पदोन्नति नियम 2002 में आरक्षण देते आई है। इसको लेकर अनारक्षित वर्ग के कर्मचारी हाईकोर्ट चले गए थे। कोर्ट ने 30 अप्रैल 2016 को पदोन्नति में आरक्षण के नियम को निरस्त कर दिया था। इसके बाद राज्य सरकार और अजाक्स सुप्रीम कोर्ट चले गए थे। 
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यह दिया सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय  
सर्वोच्च न्यायालय  ने कहा कि इस पर केंद्र सरकार फैसला करे। हम अपनी तरह से कोई पैमाना तय नहीं करेंगे। कोई भी फैसला करने से पहले उच्च पदों पर नियुक्ति का आंकड़ा जुटाना जरूरी है। यानी वस्तु स्थिति बरकरार रहेगी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने 6 बिंदु तय किए हैं। अब अलग-अलग मुद्दों पर इन बिंदुओं के आधार पर देखा जाएगा कि केंद्र या राज्य सरकार ने क्या किया है। ऐसे मामलों की सुनवाई अब 24 फरवरी से होगी। 

इससे पहले शीर्ष अदालत ने 26 अक्टूबर 2021 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) बलबीर सिंह के साथ ही मध्य प्रदेश, झारखंड समेत विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ वकीलों ने सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि यह सच है कि देश की आजादी के 75 साल बाद भी अनुसूचित जाति/जनजाति समुदाय के लोगों को अगड़ी जातियों के स्तर पर नहीं लाया जा सका है। वेणुगोपाल ने तर्क दिया था कि एससी और एसटी समुदायों के लोगों के लिए ग्रुप "ए" श्रेणी की नौकरियों में उच्च पद प्राप्त करना अधिक कठिन है। अब समय आ गया है कि सुप्रीम कोर्ट एससी, एसटी और ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के रिक्त पदों को भरने के लिए कुछ ठोस आधार दे।
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