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Ratlam News: पुत्री की आयु की बालिका से ज्यादती कर समाज की आत्मा को झकझोर दिया, अब मिला दोहरा आजीवन कारावास

Thu, 07 May 2026 11:07 PM IST
रतलाम ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रतलाम

सार

रतलाम की पॉक्सो अदालत ने नौ वर्षीय बालिका से दुष्कर्म के दोषी राजेंद्र सिंह को दोहरे आजीवन कारावास और 27 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत ने अपराध को जघन्य बताते हुए कहा कि आरोपी ने समाज की आत्मा को झकझोर दिया, वह दया का पात्र नहीं है। 
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अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई (सांकेतिक) - फोटो : ANI
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विस्तार
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रतलाम में पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायालय ने करीब नौ वर्षीय बालिका को आधी रात घर से उठाकर खेत में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले अभियुक्त युवक राजेंद्र सिंह पिता शंभू सिंह निवासी नामली को दोहरे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उस पर कुल 27 हजार रुपए का जुर्माना भी किया गया। न्यायालय ने कहा कि अभियुक्त ने अपने पुत्री की आयु की बालिका के साथ बलात्संग कर समाज की आत्मा को झकझोर दिया है। यह कल्पना करना भी असंभव है कि बालिका पर घटना के समय क्या गुजरी होगी।

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अभियोजन विभाग की सहायक निदेशक आशा शाक्यवार ने बताया कि एक गांव की नौ वर्षीय बालिका 11 जून 2023 की रात 12 बजे के बाद घर के बाहर पलंग पर अपनी नानी के पास सोई हुई थी। अन्य परिजन भी सो रह थे। रात करीब दो बजे बालिका की नानी ने सभी परिजन को उठाया तो उन्होंने देखा कि बालिका रो रही थी। पूछने पर उसने बताया कि घर के पीछे खेत में बिजली की डीपी के पास नींद खुली तो उसने देखा कि उसे परिचित राजेंद्र सिंह उठाकर लाया था। राजेंद्र सिंह ने खेत में लेटा कर उसके साथ गंदा काम किया। चिल्लाने पर उसने थप्पड़ों से मारपीट की। उसने यह भी देखा कि आरोपी के हाथ में राजेंद्र सिंह नाम भी गुदा हुआ था। राजेंद्र सिंह ने कहा कि चुपचाप घर जाकर सो जाना और किसी को मत बताना। उसने घटना किसी को बताई तो वह मार डालेगा। वहां से घर आकर उसने गटना नानी को बताई। तब उसकी नानी ने राजेंद्र सिंह को रोशनी में भागते हुए देखा था और बालिका के माता-पिता को उठाकर घटना की जानकारी दी  थी। बालिका की हालत बिगड़ी ही थी। परिजन ने उसे जिला अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया था, पांच दिन के इलाज के बाद उसकी अस्पताल से छुट्टी हुई थी। पुलिस ने विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर अभियुक्त राजेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर लिया था।

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पुलिस ने प्रकरण जघन्य एवं सनसनीखेज क्षेणी में चिन्हित कर विवेचना के बाद राजेंद्र सिंह के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया था। सुनवाई के बाद न्यायालय (विशेष न्यायाधीश राकेश कुमार शर्मा) ने अभियुक्त राजेंद्र सिंह को पॉक्सो एक्ट की धारा 5 एम सहपठित धारा 6 और धारा 5 आई सहपठित धारा 6 में आजीवन कारावास एवं दस-दस हजार रुपए का जुर्माना से दंडित किया। साथ ही उसे भादंवि की धारा 363 में 10 वर्ष कठोर कारावास एवं पांच हजार रुपए का जुर्माना, धारा 323 भादवि में एक वर्ष के कठोर कारावास एवं एक हजार जुर्माना और धारा 506 भाग-2 में दो वर्ष के कठोर कारावास एवं  एक हजार रुपए का जुर्माना से भी दंडित किया। साथ ही संपूर्ण जुर्माना राशि जमा होने पर उसमें से 20 हजार रुपए की राशि प्रतिकर के रूप पीड़िता को देने के आदेश भी दिए। प्रकरण में शासन की तरफ से पैरवी विशेष लोक अभियोजक (सहायक जिला अभियोजन अधिकारी) गौतम परमार  ने की।
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अपराधी दया का पात्र नहीं
पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायालय द्वारा प्रकरण की परिस्थितियों एवं अभिलेख पर आए साक्ष्य पर बड़ी ही संवेदनशीलता के साथ विचार कर निर्णय दिया गया। अपने निर्णय में न्यायालय द्वारा कहा गया है कि अभियोक्त्री 09 वर्ष 07 माह की बालिका है और अभियुक्त की उम्र 32-34 वर्ष है। इस अभियुक्त ने अपने पुत्री की आयु की बालिका के साथ बलात्संग कर समाज की आत्मा को झकझोर दिया है। यह कल्पना करना भी असंभव है कि बालिका पर घटना के समय क्या गुजरी होगी। निर्णय में यह भी उल्लेखित किया गया है कि भारत देश में 12 वर्ष से कम उम्र की बालिका को देवी का रूप  मानकर उनकी पूजा की जाती है, किंतु कई वर्षों से छोटी बालिकाओं के साथ लैंगिक एवं बलात्संग की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिसे देखते हुए वर्तमान प्रकरण के अपराधी द्वारा जघन्य तरीके से घटना कारित की गई है। इसलिए किसी भी तरह से यह अपराधी दया का पात्र नहीं है और उसे कड़ी सजा दी गई है। 

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