रतलाम के प्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर के पुजारी द्वारा अपने भाई की मौत होने के बावजूद भी मंदिर में सेवा पूजा की, जिसके चलते श्रीमाली ब्राह्मण समाज ने प्रशासन के समक्ष अपना विरोध दर्ज करवाया। विरोध के चलते रतलाम जिला प्रशासन ने रविवार रात को मंदिर में ताला लगा दिया। प्रशासन ने अस्थाई पुजारी की नियुक्ति कर मंदिर का ताला खोला, जिसके बाद श्री माली ब्राह्मण समाज ने मंदिर का शुद्धिकरण भी किया।
शहर के माणक चौक स्थित महालक्ष्मी मंदिर में भक्तों की गहरी आस्था है। महालक्ष्मी माता को श्री माली ब्राह्मण समाज अपनी आराध्य देवी मानता है। मंदिर की सेवा पूजा करने वाले पंडित संजय पुजारी के भाई की कुछ दिनों पूर्व मौत हो गई थी। उसके बावजूद भी पुजारी ने सूतक काल में भी मंदिर की सेवा पूजा बंद नहीं की, जिसकी जानकारी मिलने पर श्री माली ब्राह्मण समाज के लोगों ने सूतक काल में पूजा करने पर प्रशासन के सामने अपना विरोध दर्ज करवाया। जिला प्रशासन ने विरोध के चलते रविवार रात मंदिर का गेट बंद कर मंदिर पर ताला लगा दिया। सोमवार सुबह नायाब तहसीलदार आशीष उपाध्याय की मौजूदगी में मंदिर का ताला सुबह 8:15 खोला गया। प्रशासन ने संजय पुजारी को भी हटा दिया है, उसके स्थान पर प्रशासन ने सत्यनारायण व्यास को अस्थायी पुजारी नियुक्त किया है।
इसके पहले पंडित संजय दवे के नेतृत्व में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ लोगों ने मंदिर के बाहर पूजा-अर्चना की, जिसके बाद श्रीमाली समाज ने महालक्ष्मी मंदिर का गोमूत्र से शुद्धिकरण किया। नायब तहसीलदार आशीष उपाध्याय ने बताया कि पूर्व पुजारी की शिकायत को लेकर उन्हें हटाया गया है। उनके स्थान पर अभी एक नए पंडित की अस्थायी रूप से नियुक्ति की गई है। श्रीमाली ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष नयन व्यास ने बताया कि महालक्ष्मी मंदिर हमारा है। समाज की सती माता का भी मंदिर में स्थान है। पुजारी को पूर्व में निवेदन किया था कि सूतक में मंदिर में ना जाएं, लेकिन वह नहीं माने।