न्यायालय ने निर्माण कार्यों के ठेकेदार से रिश्वत लेने के लगभग पांच वर्ष पुराने मामले में जावरा नगर पालिका की तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) नीता जैन (निवासी नई आबादी, मंदसौर) तथा सहायक राजस्व निरीक्षक विजयसिंह शक्तावत (निवासी लाल इमली गली, जावरा) को दोषी पाया। न्यायालय ने दोनों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 तथा भादंवि की धारा 120-बी के तहत चार-चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। दोनों पर प्रत्येक धारा में कुल दो-दो हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। निर्णय गुरुवार को विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) संजीव कटारे ने सुनाया। फैसले के बाद दोनों को जेल भेज दिया गया।
अभियोजन विभाग की प्रभारी उपनिदेशक एवं सहायक निदेशक आशा शाक्यवार ने बताया कि ठेकेदार पवन भावसार ने 9 मार्च 2021 को लोकायुक्त कार्यालय उज्जैन में लिखित शिकायत की थी। शिकायत में बताया गया कि उन्हें अपने मित्र सुरेश प्रजापत के लाइसेंस पर नगर पालिका परिषद जावरा के विभिन्न निर्माण कार्यों के ठेके मिले थे। कार्य समय पर पूर्ण करने के बाद भी उनकी 1.23 लाख रुपये की एफडीआर तथा 50 हजार रुपये का अंतिम बिल लंबित था।
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एफडीआर जारी कराने और अंतिम बिल स्वीकृत कराने के लिए जब वे सीएमओ नीता जैन से मिले, तो उन्होंने कुल राशि का तीन प्रतिशत, अर्थात 42 हजार रुपये रिश्वत मांगी। पुष्टि के लिए लोकायुक्त निरीक्षक बसंत श्रीवास्तव ने शिकायतकर्ता को डिजिटल वॉइस रिकॉर्डर देकर बातचीत रिकॉर्ड करने को कहा। रिकॉर्डिंग में नीता जैन ने विजयसिंह शक्तावत से बात करने को कहा, जिसके बाद शक्तावत ने 26 हजार रुपये की मांग की। अनुरोध पर 20 हजार रुपये लेने पर सहमति बनी। 12 मार्च 2021 को लोकायुक्त दल ने जाल बिछाया। शिकायतकर्ता ने विजयसिंह शक्तावत को 18,500 रुपये दिए, जिन्हें उसने पैंट की पीछे बायीं जेब में रख लिया। इशारा मिलते ही दल ने उसे पकड़कर रिश्वत की राशि जब्त कर ली। विवेचना के बाद दोनों के विरुद्ध न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया।