राजगढ़ में कलेक्टर सरपंचों से बातचीत करते हुए।
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राजगढ़ जिले की ग्राम पंचायतों के लिए पिछले दिनों जिला पंचायत सीईओ अक्षय तेमjवाल ने आदेश जारी किया था। कहा था कि ग्राम पंचायतों में सरपंच काम किए बगैर पैसे नहीं निकाल सकेंगे। उपयंत्री का मूल्यांकन व सहायक यंत्री के सत्यापन के बाद पहली और आगे की किस्ते जारी होंगी।
इस आदेश का राजगढ़ जिले में सरपंच संघ ने विरोध किया। जिले में सरपंच संघ के सभी सदस्य सोमवार को जिला मुख्यालय में जुटे। जिला पंचायत सीईओ अक्षय तेमरवाल के आदेश और ग्राम पंचायतों की अन्य समस्यायों को सामने रखते हुए प्रदर्शन किया। उनका ज्ञापन लेने आए तहसीलदार व एसडीएम से मिलने से इनकार किया और कलेक्टर हर्ष दीक्षित से मिलने की बात पर अड़े रहे।
कलेक्टर उस समय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में व्यस्त थे। इस वजह से सभी सरपंच कलेक्ट्रोरेट सभाकक्ष के मीटिंग हॉल में बैठ गए। एक घंटे बाद जब कलेक्टर फ्री होकर बाहर निकले तो सरपंच संघ के सदस्यों से मुलाकात की। दो घंटे तक सरपंचों की समस्याओं को सुना। उनकी समस्याओं के संबंध में दिशा निर्देश भी दिए।
जिला पंचायत सीईओ के आदेश पर उन्होंने सरपंचों से दो टूक शब्दों में कहा कि सचिवों की शिकायतें कथित सरपंच के विरुद्ध आती है कि उन पर दबाव बनाकर बगैर कोई कार्य किए राशि निकाल ली गई है। कोई कार्य नहीं किया जाता, ऐसे में सचिव अपनी नौकरी बचाने के चक्कर मे आहरण की गई राशि तो जमा कर देते हैं लेकिन सरपंचों द्वारा आहरण की राशि की रिकवरी के लिए धारा 40 एवं 92 की कार्यवाही करनी पड़ती है। जिला पंचायत सीईओ ने इसी वजह से यह आदेश जारी किया है। मैं कोशिश करूंगा कि आपको सात से 15 दिन का वक्त दिया जाए। आप राशि का आहरण करने के पश्चात काम शुरू कर सकेंगे। यदि काम शुरू नहीं होता है तो संबंधित सरपंच के विरुद्ध एफआईआर दर्ज होगी।
लगभग दो घंटे चली बैठक में कलेक्टर ने सरपंच संघ के सदस्यों को संतुष्ट कर लिया।