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रायसेन का श्रीरामरसिया दरबार: सावन सोमवार और नागपंचमी पर सजी 'नागों की अदालत', उमड़ा आस्था का सैलाब

Tue, 18 Aug 2026 10:23 AM IST
रायसेन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायसेन

सार

रायसेन जिले के सिहोरा खुर्द गांव स्थित श्रीरामरसिया दरबार में सावन के आखिरी सोमवार और नागपंचमी के अवसर पर ‘नागों की अदालत’ लगी। सैकड़ों साल पुरानी मानी जाने वाली इस परंपरा में दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचे। लोगों ने नाग देवता और भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर मानसिक शांति और समाधान की कामना की। 
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सिहोरा खुर्द गांव में नागों की अदालत लगी - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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सावन का आखिरी सोमवार और नागपंचमी का संगम। इस पावन दिन रायसेन जिले की गैरतगंज तहसील के सिहोरा खुर्द गांव में आस्था की एक अलग तस्वीर देखने को मिली। यहां स्थित श्रीरामरसिया दरबार में हर वर्ष लगने वाली ‘नागों की अदालत’ में इस बार भी दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचे। धूप, बेलपत्र और नाग देवता के जयकारों के बीच यह दरबार सिर्फ पूजा का केंद्र नहीं, बल्कि लोगों की गहरी आस्था और लोक मान्यताओं का प्रतीक बन गया है।
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स्थानीय परंपरा के अनुसार, सिहोरा खुर्द का श्रीरामरसिया दरबार सैकड़ों साल पुराना माना जाता है। मान्यता है कि सावन सोमवार को यहां नाग देवता स्वयं ‘न्याय’ के लिए विराजमान होते हैं। इसलिए इसे गांव वाले ‘नागों की अदालत’ कहते हैं। इस दिन विशेष रूप से वे लोग यहां आते हैं, जिनके परिवार में कभी सर्पदंश की घटना हुई हो या जिन्हें सर्प से जुड़ा कोई डर, स्वप्न या परेशानी सताती हो। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि दरबार में माथा टेकने और विधि-विधान से पूजा करने पर उन्हें मानसिक शांति और समाधान मिलता है।

सुबह से ही भक्तों से भर गया दरबार परिसर
सुबह से ही दरबार परिसर भक्तों से भर गया। महिलाएं थालियों में दूध, लड्डू और फूल लेकर पहुंचीं। शिवलिंग पर जलाभिषेक हुआ और नाग देवता की प्रतिमा पर दूध चढ़ाया गया। ढोल-नगाड़ों की गूंज और ‘हर हर महादेव’ के नारों के बीच पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। कई परिवार पीढ़ियों से यहां आते हैं। उनका कहना है कि यह आयोजन उनके पूर्वजों के समय से चला आ रहा है।
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पंडा जी संभालते हैं दरबार की परंपरा
दरबार की परंपराओं को संभालने की जिम्मेदारी अजब सिंह जी की है, जिन्हें लोग आदर से ‘पंडा जी’ कहते हैं। उनका कहना है कि यह अदालत किसी कानूनी मंच जैसी नहीं है। यह आस्था का दरबार है, जहां लोग अपने मन के भय और सवाल लेकर आते हैं। पंडा जी के अनुसार, सावन में भगवान शिव और नाग देवता की पूजा का विशेष महत्व शास्त्रों में बताया गया है। इसी विश्वास के चलते हर साल बड़ी संख्या में लोग यहां एकत्र होते हैं।

रायसेन और विदिशा से भी पहुंचते हैं श्रद्धालु
सिहोरा खुर्द के लिए यह आयोजन सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पहचान भी बन गया है। आसपास के गांवों से ही नहीं, रायसेन और विदिशा जिलों से भी लोग यहां पहुंचते हैं। कई श्रद्धालु पैदल यात्रा कर आते हैं। ग्रामीणों का मानना है कि इस दरबार की वजह से गांव में भाईचारा और शांति बनी रहती है।

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प्रशासन ने किए सुरक्षा के इंतजाम
भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने भी सुरक्षा और साफ-सफाई के इंतजाम किए थे। स्वास्थ्य दल तैनात रहा, ताकि किसी को दिक्कत न हो। पुलिस ने यातायात व्यवस्था संभाली। सिहोरा खुर्द की ‘नागों की अदालत’ यह बताती है कि भारत में आस्था के कितने अनूठे रूप हैं। यहां कानून की किताब नहीं, बल्कि विश्वास और परंपरा के जरिए लोग अपने दुख-सुख साझा करते हैं।
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