मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस के टिकटों का निर्णय अब स्क्रीनिंग कमेटी के पास चला गया है।
चुनाव समिति ने नामों के पैनल स्क्रीनिंग कमेटी के पास भेज दिए हैं, जिसमें 230 सीटों के लिए 1 से 5 तक नाम दिए गए हैं।
कांग्रेस सूत्रों की मानी जाए तो अंतिम फैसला कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के कार्यालय से हुए सर्वे के आधार पर ही किया जाएगा। चार चरणों के इस सर्वे में करीब 180 सीटों के नामों पर विचार कर लिया गया है।
रविवार को चुनाव समिति की आखिरी बैठक में 158 सीटों के लिए 3-3 नाम दिए गए हैं, वहीं 40 सीटों पर 1-1 नाम दिया गया है। शेष 32 सीटों पर 5-5 नाम का पैनल बनाया गया है।
40 सीटों पर 1-1 नाम का निर्णय होने के बाद भी पक्का नहीं है कि इन्हीं नामों को अंतिम रूप से मान्य किया जाएगा। स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक 26-27 सितंबर को होने वाली है।
एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता के अनुसार, 'अभी स्क्रीनिंग कमेटी और वर्किंग कमेटी के पास ये पैनल जाएंगे। इसका मतलब है कि चुनाव समिति से भले ही एक नाम चला गया हो, जरूरी नहीं है कि वही अंतिम नाम ही तय हो।'
राहुल का चौथा सर्वे
मध्य प्रदेश में वरिष्ठ नेताओं की राय ली जा रही है और उनसे उम्मीदवारों के नाम भी लिए जा रहे हैं, लेकिन टिकटों का फैसला अंत में जीतने की काबिलियत के आधार पर ही होगा।
जीतने की काबिलियत के बारे में कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी के कार्यालय से कुछ मापदंड तैयार किए गए हैं।
राहुल गांधी का कार्यालय चार चरणों का एक सर्वे कर रहा है। जिसके दो चरण हो चुके हैं। उन दो चरणों के सर्वे में करीब 180 नामों का चुनाव तकरीबन कर लिया गया है।
तीसरे चरण के सर्वे में इस बात का पता लगाया जा रहा है कि लोगों की सोच में कोई डेविएशन तो नहीं हो रहा है। अंत में एक सर्वे चयन किए गए प्रत्याशी के बारे में जनता की राय या धारणा के बारे में किया जाएगा।
एक कांग्रेस नेता के अनुसार, 'चुनाव समिति के फैसले से सर्वे का कोई लेना-देना नहीं है। अंतिम फैसला तो सर्वे के आधार पर ही होगा, ताकि निष्पक्ष और जीतने वाले उम्मीदवार का पता लगाया जा सके। उसके लिए कुछ मापदंड तय किए गए हैं।'
दिग्विजय के गुस्से की कहानी
दिल्ली में चुनाव समिति की बैठक के दौरान कांग्रेस नेता यह कहानी सुनाते रहे कि जबलपुर से कल्याणी पांडे का नाम पैनल में डलवाने के लिए कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह कैसे खफा हो गए।
कमलनाथ, जबलपुर से कल्याणी पांडे का नाम पैनल में डालने के पक्ष में नहीं थे। जहां दिग्विजय समर्थकों ने कहा कि कहानी मीडिया की उपज है, वहीं विरोधियों की राय थी कि दिग्विजय ने यह स्टोरी बनाई है, ताकि वे कल्याणी पांडे का टिकट कट जाए तो पल्ला झाड़ सकें।
बेटों के लिए मांग रहे टिकट
चुनाव समिति की बैठक के बारे में कहा जा रहा है कि मध्य प्रदेश के कई वरिष्ठ नेताओं के पुत्रों के लिए विधानसभा का टिकट मांगा जा रहा है। इनमें दिग्विजय सिंह के पुत्र जयवर्धन सिंह राघौगढ़ से टिकट मांग रहे हैं।
वहीं प्रदेश अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया के बेटे विक्रांत भूरिया भी टिकट के इच्छुक हैं। इनके अलावा सांसद सज्जन सिंह वर्मा और प्रेमचंद गुड्डू अपने पुत्रों के लिए टिकट मांग रहे हैं।
चुनाव समिति की एक और सदस्य विजयलक्ष्मी साधौ भी अपने भाई देवेंद्र साधौ के लिए महेश्वर से टिकट मांग रही हैं।