मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में रविवार को चीता उदय की मौत का रहस्य गहरा गया है। शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उदय की मौत की वजह कार्डियोपल्मोनरी फैल्योर बताया गया है। इसके बाद भी फिलहाल फॉरेंसिक और नेक्रॉप्सी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि लक्षणों के उभरने के कुछ ही घंटों में उदय की मौत हो गई। सांप के काटने से लेकर अन्य कारणों की तलाश की जा रही है। रिपोर्ट्स मिलने के बाद पुष्टि हो सकेगी कि अचानक उदय को कार्डियोपल्मोनरी फैल्योर क्यों हुआ?
इस बीच, ग्वालियर में वन विभाग की एक बड़ी बैठक बुलाई गई। बताया जाता है कि प्रधान मुख्य वनसंरक्षक (वन्यप्राणी) जेएस चौहान ने केंद्र सरकार को कुछ चीतों के शिफ्टिंग को लेकर पत्र लिखा है। चौहान ने सोमवार को कहा था कि एक जगह पर 20-25 चीते ही हो सकते हैं। इस वजह से विकल्प के तौर पर देखे गए स्थानों पर चीतों को शिफ्ट करना चाहिए। इस पृष्ठभूमि में ग्वालियर में वरिष्ठ वन अधिकारियों की बैठक बुलाई गई थी। इसमें प्रोजेक्ट चीता से जुड़ी घटनाओं में गोपनीयता बरतने को भी कहा गया है ताकि प्रोजेक्ट को लेकर किसी तरह की गलतफहमी या मिस रिपोर्टिंग न हो जाए। इससे प्रोजेक्ट को नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि चीतों की मौत होना असामान्य नहीं है। जब भी किसी प्राणी को नई जगह बसाया जाता है तो मौतें होती हैं। इसके बाद भी जिन्हें बचाया जा सकता है, उन्हें बचाने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए या नहीं, यह देखना जरूरी है। साथ ही भविष्य में ऐसा न हो, इसके लिए प्रभावी इंतजाम करना जरूरी हो जाता है।
दक्षिण अफ्रीका के मतलाबास नदी के पास से पकड़ा गया चीता उदय छह साल का था। 18 फरवरी को भारत आए 12 चीतों में से एक था। इससे एक महीने पहले नामीबिया से आई फीमेल चीता साशा की किडनी की बीमारी की वजह से मौत हो गई थी। नामीबिया के चीता कंजर्वेशन फंड की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर लॉरी मार्कर ने कहा कि वैज्ञानिकों के नाते हम नेक्रॉप्सी रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। उसके बाद ही हम किसी नतीजे पर पहुंच सकेंगे। लक्षण नजर आते ही उदय को तत्काल चिकित्सा सहायता दी गई। इस तरह के प्रोजेक्ट लॉन्ग टर्म के होते हैं। अच्छी बात यह है कि नामीबिया से आए चीते नए माहौल में घुल-मिल गए हैं। बच्चों ने भी जन्म लिया है। यह प्रोजेक्ट को व्यवहारिक बनाता है।
राजस्थान का मुकुंदरा या गांधीसागर हो सकते हैं चीतों के नए घर
कूनो नेशनल पार्क में चीतों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इन्हें नई जगहों पर शिफ्ट किया जा सकता है। इनमें राजस्थान के मुकुंदरा या मध्यप्रदेश के गांधीसागर अभयारण्य भेजे जाने की संभावना अधिक है। फैसला केंद्र सरकार को लेना है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से आए कुछ चीते अब भी बाड़े में बंद है। वहां पर दक्षिण अफ्रीकी चीते भी छोड़े गए हैं। इस वजह से उनकी संख्या अधिक है। कूनो नेशनल पार्क में भी खुले जंगल में सबको छोड़ना फिलहाल मुश्किल लग रहा है। नामीबिया से आए चीते पवन (ओबान) को ही लें तो एक महीने में चार बार वह पार्क से बाहर निकल चुका है। बार-बार ट्रैंकुलाइज कर उसे पार्क एरिया में लाया गया है। ऐसे में पवन समेत कुछ अन्य चीतों को नई जगहों पर शिफ्ट करने पर चर्चा शुरू हो गई है। मुकुंदरा में पहले से फेंसिंग की हुई है। वहीं, गांधीसागर में फेंसिंग की जा रही है। इन्हें लांघकर बाहर निकला चीतों के लिए आसान नहीं होगा।