कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के भगवा धारी लोगों के संबंध में दिए गए विवादास्पद बयान के बाद शहर की दीवारों पर ऐसे पोस्टर दिखाई दिए जिनमें हिंदू धर्मस्थलों में सिंह के प्रवेश पर प्रतिबंध की मांग की गई। हालांकि बाद में पोस्टर हटा लिए गए जिन पर किसी संगठन या व्यक्ति का नाम नहीं था।
एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि बुधवार देर रात के बाद शहर के कुछ मंदिरों के बाहर ऐसे पोस्टर देखे गए। एक पोस्टर चार इमली इलाके के एक मंदिर के पास भी देखा गया। पोस्टर में लिखा है, हिंदू समाज की यही पुकार, हिंदू विरोधी दिग्विजय सिंह के लिए मंदिरो के दरवाजे बंद हों, बंद हों- हिंदू समाज।
पोस्टर में दिग्विजय सिंह की तस्वीर भी लगाई गई है। हालांकि, बाद में सुबह इन पोस्टरों को हटा दिया गया। इससे पहले मंगलवार को सिंह ने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया था कि ‘भगवा वस्त्र पहनकर लोग चूरन बेच रहे हैं। भगवा वस्त्र पहनकर बलात्कार हो रहे हैं, मंदिरों में बलात्कार हो रहे हैं, क्या यही हमारा धर्म है, हमारे सनातन धर्म को जिन लोगों ने बदनाम किया है, उन्हें ईश्वर भी माफ नहीं करेगा।’
दक्षिणपंथी संगठन संस्कृत बचाओ मंच के प्रमुख चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि मुझे भी दिग्विजय सिंह के बारे में ऐसे पोस्टरों के बारे में पता चला है। उनके बार-बार दिए गए हिन्दू विरोधी बयानों पर यह स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी। यह गुस्सा भोपाल सीट से हालिया लोकसभा चुनावों के दौरान उनकी हार के रुप में भी देखने को मिला है। दूसरी ओर प्रदेश कांग्रेस के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने दिग्विजय सिंह को कट्टर हिंदू करार दिया।
सलूजा ने कहा, ‘दिग्विजय जी की तुलना में सनातन धर्म या हिंदू धर्म का कोई बड़ा अनुयायी नहीं है। भाजपा ने राजनीतिक लाभ के लिए उनके बयान को विकृत कर दिया। उन्होंने ऐसे कामों में शामिल भगवाधारी लोगों के बारे में बात की और उनके बारे में लोगों को पता है। हर कोई जानता है कि दिग्विजय जी बहुत धार्मिक व्यक्ति हैं।’