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डॉक्टर बनने निकले थे, पहुंच गए जेल

Mon, 23 Jun 2014 10:49 AM IST
जयप्रकाश पाराशर/अमर उजाला, भोपाल
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मध्यप्रदेश प्री-मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) में हेराफेरी के आरोपों में गिरफ्तार लड़कियों का समूह दो दिन पहले ही अदालत में चिल्ला रहा था, 'मामा को बुलाओ, मामा को बुलाओ।'
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यहां मामा शब्द मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। पुलिस की गाड़ी में आधी रात की धरपकड़ में गिरफ्तार की गई लड़कियां कह रही थी, 'हमारा तो पीएमटी में नंबर भी नहीं आया, फिर गिरफ्तार क्यों किया जा रहा है।'

अब कई छात्राओं को अवैध रूप से हिरासत में रखने का मामला तूल पकड़ रहा है। एक सदस्यीय जांच बैठा दी गई है।

वहीं विशेष जांच बल (एसटीएफ) के ऊपर आरोप लग रहे हैं कि वह आरोपी लड़कियों के अभिभावकों को भी धमका रहा है।

अभिभावकों की ओर से आरोप लग रहे हैं कि एसटीएफ ने कई छात्राओं को हिरासत में तो ले रखा है लेकिन उनकी गिरफ्तारी नहीं दिखाई जा रही है। माता पिता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं।
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गिरफ्तार की गई लड़कियां भी कॉल डिटेल्स और अन्य फौरी साक्ष्यों के आधार पर ही इन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अब इन लोगों से दलालों के बारे में पूछताछ की जा रही है।

अभिभावकों का कहना है कि किसी दलाल से फोन पर बात हुई थी, केवल इस आधार पर गिरफ्तारियां कर ली गई हैं। वहीं एसटीएफ का कहना है कि जरूरत पड़ने पर पूछताछ के लिए इन छात्रों को रखा गया है।

कभी इन लड़के लड़कियों ने डॉक्टर बनने के लिए जमीन आसमान एक कर दिया था। उनके माता पिता उनके एडमिशन के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ते थे। अब ये लड़कियां महिला थाने में ठूंस दी गई हैं।

उनके माता पिता खाने पीने से लेकर हर बात के लिए परेशान हैं। ये छात्र पूरे प्रदेश से लाए गए हैं। कई मामलों में तो ऐसा हुआ कि

पुलिस को घर पर छात्र नहीं मिले तो पुलिस उस परिवार की महिला सदस्य को ही पकड़ लाई है।

गिरफ्तार किए गए लड़के-लड़कियों के माता-पिता बदहवास घूम रहे हैं। कोई ग्वालियर से आया है तो कोई छतरपुर से। किसी के पिता कह रहे हैं कि वह अपनी पत्नी को क्या बताएं समझ नहीं आ रहा है। किसी को चिंता है कि बेटी की शादी कैसे होगी। कई लोगों की तकलीफ यह है कि बच्चों का भविष्य क्या होगा।
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