मध्यप्रदेश के मालवा और ग्वालियर जैसे क्षेत्रों में लोग पोस्टर लगाकर राजनीतिक पार्टियों का विरोध कर रहे हैं। इन पर लिखा है, 'यह घर सामान्य वर्ग का है। कृपया राजनीतिक पर्टियां वोट मांग कर शर्मिंदा न करें। हम अपना वोट सिर्फ नोटा को देंगे।' यह पोस्टर सामान्य वर्ग द्वारा लगाए गए हैं। जिनमें लोगों ने उन राजनीतिक पार्टियों का कड़ा विरोध किया है जो एससी/एसटी विधेयक के समर्थन में थीं। इस तरह के पोस्टर लोगों ने अपने घरों के बाहर लगाए हुए हैं।
बता दें ये बिल संसद में अगस्त के पहले हफ्ते में ही पास हुआ है। इस तरह के पोस्टर राज्य के नीमच जिले में स्थित अकली गांव में भी लगाए गए हैं। यह गांव जिले से करीब 20 किमी की दूरी पर ही स्थित है। यहां करीब 750 मतदाता हैं जिनमें ज्यादातर संख्या सामान्य वर्ग और अन्य पिछड़ा वर्ग की है।
अकली गांव के रहने वाले कृष्णा पाल सिंह ने कहा कि राजनीतिक पार्टियों के एससी एसटी बिल के प्रति व्यवहार को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि वह सामान्य वर्ग के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि हम ऐसे अन्यायपूर्ण कानूनों के खिलाफ हैं जो पुलिस को अधिकार देते हैं कि वह बिना जांच के किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि वह किसी भी राजनीतिक पार्टी को वोट नहीं देंगे और उनका वोट नोटा को ही जाएगा।
वहीं गांव के एक अन्य निवासी पर्वत सिंह का कहना है कि भाजपा सरकार ने उन्हें धोखा दिया है। उन्होंने कहा कि वह इस तरह के कानूनों और आरक्षण के खिलाफ हैं। जो जाति के आधार पर प्रदान किया जाता है। आरक्षण आर्थिक स्थिति पर आधारित होना चाहिए न कि जाति के आधार पर।
एक अन्य व्यक्ति रामकुमार सिंह का तो कहना है कि 'जब हमारे लिए यहां कुछ नहीं है, हर चीज दलितों के लिए है। किसी भी समय कोई भी एससी एसटी कानूनों का दुरुपयोग कर सकता है। कोई भी इस कानून का हमारे खिलाफ प्रयोग कर सकता है। तो हम क्यों राजनीतिक पार्टियों को वोट दें।' इस मामले पर जब राज्य के भाजपा प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस तरह के किसी पोस्टर के बारे में नहीं पता है।