पटवारी प्रसन्न सिंह बघेल पहले सेना में थे।
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रेत माफिया द्वारा ट्रैक्टर से कुचलकर जिस पटवारी की हत्या की गई, वह रिटायर्ड फौजी था। फौज की नौकरी से रिटायर होने के बाद 2018 में प्रसन्न सिंह बघेल ने पटवारी की नौकरी जॉइन की थी। तब से पटवारी शहडोल जिले में ही पोस्टेड था। वह अपने घर का इकलौता चिराग था, जिसे खनन माफिया ने बुझा दिया। इस घटना ने सबको झकझोर के रख दिया है। वहीं कलेक्टर वंदना वैद्य और एसपी कुमार प्रतीक के घटना स्थल तक नहीं जाने की बात से पटवारी संघ में बेहद आक्रोश है।
ADGP पहुंचे घटना स्थल, किया निरीक्षण
शहडोल जोन के ADGP डीसी सागर ने जिला प्रशासन की ओर से घटना स्थल का निरीक्षण किया और घटना को हृदयविदारक बताया। ADGP ने बताया कि पुलिस ने इस मामले में वाहन चालक के अलावा ट्रैक्टर मलिक नारायण सिंह निवासी मैहर को भी गिरफ्तार कर लिया है।
घटना के कुछ देर पहले की तस्वीर
घर में बताया एक्सीडेंट से हुई मौत
रीवा जिले के सेमरिहा थाना अंतर्गत बरांव गांव में पटवारी प्रसन्न सिंह बघेल का गांव है। घर में बुजुर्ग माता पिता रहते थे। प्रशासन की ओर से घर में सूचना दी गई कि पटवारी प्रसन्न की सड़क हादसे में मौत हो गई है। प्रसन्न की बहन और बहनोई ने घर में अंतिम संस्कार की पूरी तैयारी की और आनन फानन में अंतिम संस्कार करवा दिया गया।
कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक क्यों नहीं पहुंचे घटना स्थल
पटवारी संघ के ज़िला अध्यक्ष सत्यनारायण मिश्रा ने कहा कि जिले में इतनी बड़ी घटना हो गई और कलेक्टर-एसपी जिला मुख्यालय में ही बैठकर बयानबाजी करते रहे। दोनों अफसरों ने घटना स्थल का निरीक्षण क्यों नहीं किया यह एक बड़ा सवाल है। सुबह सात बजे ही पीएम कराकर आनन फानन में शव को सेमरिहा के लिए रवाना कर दिया गया।
पटवारी संघ करेगा विरोध प्रदर्शन
पटवारी संघ के जिला अध्यक्ष सत्यनारायण मिश्रा ने बताया कि इस मामले में पटवारी संघ विरोध प्रदर्शन करेगा। रात में बिना सुरक्षा के पटवारियों में दल को पेट्रोलिंग के लिए क्यों भेजा गया। यह बड़ी लापरवाही की श्रेणी में आता है। मैं अभी अंतिम संस्कार में शामिल होकर वापस लौट रहा हूं, जल्द ही आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेंगे।